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शनिवार, 19 सितंबर 2020

गीतिका "मन्द समीर बहाते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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धरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं,

जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं।

--

हरित क्रान्ति के संवाहक, ये जन,गण के रखवाले,

प्राण प्रवाहित करने वाली, मन्द समीर बहाते हैं।

--

पत्ते, फूल, मूल, फल जिनके, जीवन देने वाले हैं,

देते हैं ये अन्न और अमृत सा जल बरसाते हैं।

--

उपवन, आँगन, खेत, बाग में हमको पेड़ लगाने हैं,

इनकी शीतल छाया में ही जीव-जन्तु सुख पाते हैं।

--

धरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से,

कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।

18 टिप्‍पणियां:

  1. धारा से कुछ लेना है, तो लौटाना भी जरुरी है

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (२०-०९-२०२०) को 'भावों के चंदन' (चर्चा अंक-३०३८) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  3. वृक्ष और उनका मानव के लिए महत्त्व, सभी कुछ सरसता से समेटे सुंदर मनभावन गितिका।

    जवाब देंहटाएं
  4. धरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से,

    कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।
    वाह!!!
    सुन्दर ....सार्थक...।

    जवाब देंहटाएं
  5. धरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से,

    कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।
    वाह!!!
    सुन्दर ....सार्थक...।

    जवाब देंहटाएं
  6. धरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से,

    कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।
    वाह!!!
    सुन्दर ....सार्थक...।

    जवाब देंहटाएं
  7. सुंदर संदेश। सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  8. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शनिवार (07-08-2021) को "नदी तुम बहती चलो" (चर्चा अंक- 4149) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद सहित।

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  9. पेड़ों की उपयोगिता पर सार्थक गीतिका।
    अप्रतिम।

    जवाब देंहटाएं
  10. सुंदर सृजन आदरणीय ।
    धरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं,

    जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं।

    जवाब देंहटाएं

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