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बुधवार, 9 सितंबर 2020

एतिहासिक विवरण "जानिए मेरे खटीमा को भी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

     मेरा नगर खटीमा 
        भारत के उत्तराखण्ड राज्य में ऊधम सिंह नगर जनपद की एक तहसील है खटीमा। ऊधम सिंह नगर जनपद के पूर्वी भाग में स्थित इस तहसील का मुख्यालय खटीमा नगर में स्थित हैं। इसके पूर्व में नेपाल, पश्चिम में सितारगंज तहसील, उत्तर में चम्पावत जनपद की श्री पूर्णागिरी तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का पीलीभीत जिला है। खटीमा  उत्तराखण्ड राज्य के ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित एक नगर निगम बोर्ड है। खटीमा नगर पंचायत को वर्ष 1988 में उच्चीकृत कर नगर पालिका का दर्जा दिया गया था। यह कस्बा भारत-नेपाल सीमा के निकट है। 

      यह क्षेत्र के अन्य भागों से अच्छे से सड़क और रेलमार्गों से जुड़ा है। यह
 दिल्ली से आठ घण्टेनैनीताल से चार घण्टे एवं हल्द्वानी से 3 घंटे की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाईअड्डा पंतनगर है। यह कस्बा अनेक महानगरो से रेल द्वारा जुड़ा हुआ है पहले यहाँ छोटी लाइन (नैरो-गेज) की रेल लाइने थीं मगर अब बड़ी रेल लाइन हो जाने से ब्रॉड-गेज की रेलगाड़ियाँ चलती हैं। 
         यहाँ से पर्यटकों के घूमने के लिए चूका रिसोर्टनानकमत्ता साहिब, पूर्णागिरि मन्दिर और नेपाल देश आदि भी है। नगर से देहरादून, हरिद्वार ,दिल्ली की टूरिस्ट बसों का संचालन भी होता है। यहाँ से 5 किमी दूर लोहियाहेड में शारदा नदी पर एक पनबिजली पावरहाउस है और कुछ अन्य उद्योग पॉलीप्लेक्स, एस्टर इण्डस्ट्रीज लिमिटेड और खटीमा फ़ाइबर्स आदि भी हैं। धान यहाँ की मुख्य फसल है। जिसके कारण यहाँ डेढ़ दर्जन से अधिक धान की मिलें हैं, जिनसे मिर्मित चावल देश ही नहीं विदेशों को भी निर्यात होता है।
         खटीमा के समीप ही 21 किमी लम्बा और 6 किमी चौड़ा शारदा सागर बाँध भी है। 
आजके आधुनिक परिवेश में भी अगर आपको पारम्परिक घोड़े ताँगे की सवारी का आनन्द लेना हो तो खटीमा से 13 किमी दूर सीमान्त कस्बे बनबसा से आप नेपाल के शहर महेन्द्र नगर घूमने भी जा सकते हैं।

शारदी नदी का बैराज पार करते ही

आपको नेपाल की सीमा देखने को मिलेगी 
और वहाँ से 6-7 किमी दूर नेपाल का महेन्द्रनगर शहर है। 
यहाँ आपको सिद्धबाबा का मन्दिर भी मिलेगा।
आप यहाँ आकर प्रसाद चढ़ाये 
और सच्चे मन से मनौती माँग कर
अपने घर को लौटें।
--
खटीमा यों तो एक बहुत पुरानी बस्ती है। 
यह आदिवासी क्षेत्र है। 
पहले यहाँ के आदिवासी राना थारू समुदाय के लोग 
निम्न प्रकार की वेश-भूषा में नजर आते थे 
किन्तु आजकल लोग पैण्ट-शर्ट आदि आधुनिक परिधान पहनते हैं।
(चित्र में थारू समाज के लोगों की पारम्परिक वेष-भूषा)
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(खटीमा में थारू नृत्य का मंचन)
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         मुगलों के शासनकाल में इसे थारू जन-जाति के लोगों ने आबाद किया था। अर्थात् यहाँ के मूल निवासी महाराणा प्रताप के वंशज राणा-थारू है।
         थारू समाज के एक व्यक्ति से मैंने इस जन-जाति के विकास के बारे में पूछा तो उसने मुझे कुछ यों समझाया।
        ‘‘जिस समय महाराणा प्रताप स्वर्गवासी हो गये थे। तब बहुत सी राजपूत रानियों ने सती होकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। लेकिन कुछ महिलायें अपने साथ अपने दास-दासियों को लेकर वहाँ से पलायन कर गये थे । उनमें हमारे पूर्वज भी रहे होंगे। ये तराई के जंगलों में आकर बस गये थे।
मैने उससे पूछा- ‘‘इस जगह का नाम खटीमा क्यों पड़ गया?’’
उसने उत्तर दिया-
‘‘उन दिनों यहाँ मलेरिया और काला बुखार का प्रकोप महामारी का विकराल रूप ले लेता था। लोग बीमार हो जाते थे और वो खाट में पड़ कर ही वैद्य के यहाँ जाते थे। इसीलिए इसका नाम खटीमा अर्थात् खाटमा पड़ गया।’’
उसने आगे बताया-
‘‘थारू समाज में विवाह के समय जब बारात जाती है तो वर को रजाई ओढ़ा दी जाती है और खाट पर बैठा कर ही उसकी बारात चढ़ाई जाती है। वैसे आजकल रजाई का स्थान कम्बल ने ले लिया है। इसलिए भी इस जगह को खाटमा अर्थात् खटीमा पुकारा जाता है।’’
मेरे अनुसार यह है खटीमा का संक्षिप्त इतिहास।


8 टिप्‍पणियां:

  1. भौगोलिक विस्तार के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्यों पर प्रकाश डालता सुन्दर परिचय ।

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  2. ज्ञानवर्धक जानकारी प्रस्तुत करने हेतु हार्दिक आभार 🙏💐🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर ज्ञानवर्धक जानकारी |आ रूपचंद्र शास्त्री जी , नमस्कार , नए ब्लोग्गर सिस्टम में हम न पोस्ट कर पा रहे हैं न कमेंन्त , मेरा नो ९४२३२४५०८६ , कृपया बात करे |

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  4. सुंदर ऐतिहासिक महत्व और जानकारी
    खूबसूरत प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 10.9.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  6. सुन्दर पर्यटन स्थल रोचक जानकारी

    जवाब देंहटाएं
  7. प्रणाम शास्त्री जी, खटीमा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने के ल‍िए बहुत बहुत धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  8. भौगोलिक क्षेत्र की ज्ञान वर्धक जानकारी , बहुत सुंदर अंक
    सार्थक चर्चा अंक, सभी रचनाकारों को बधाई,मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय तल से आभार।

    जवाब देंहटाएं

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