"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

मंगलवार, 22 सितंबर 2020

गीत "सपनों पे गिरी गाज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

निर्दोष से प्रसून भी, डरे हुए हैं आज।

चिड़ियों की कारागार में, पड़े हुए हैं बाज।

--

अश्लीलता के गान, नौजवान गा रहा,

फटी हुई पतलून से, जग को रिझा रहा,

भौंडे सुरों के शोर में, सब दब गये हैं साज।

चिड़ियों की कारागार में, पड़े हुए हैं बाज।।

--

श्वान और विडाल जैसा, मेल हो रहा,

नग्नता, निलज्जता का, खेल हो रहा,

चैनल समाज की जहाँ हों, लूट रहे लाज।

चिड़ियों की कारागार में, पड़े हुए हैं बाज।।

--

भटकी हुई जवानी है, भारत के लाल की,

ऐसी है दुर्दशा, मेरे भारत-विशाल की,

आजाद और सुभाष के, सपनों पे गिरी गाज।

चिड़ियों की कारागार में, पड़े हुए हैं बाज।।

--

लिखने को बहुत कुछ है अगर लिखने को आयें,

लिखकर कठोर सत्य, यहाँ किसको सुनायें,

जंगल में लोमड़ी के यहाँ, सिर पे धरा है ताज।

चिड़ियों की कारागार में, पड़े हुये हैं बाज।।

--

रोती पवित्र भूमि, आसमान रो रहा,

लगता है घोड़े बेच के, भगवान सो रहा,

अब तक तो मात्र कोढ़ था, अब हो गयी है खाज।

चिड़ियों की कारागार में, पड़े हुए हैं बाज।।

--

4 टिप्‍पणियां:

  1. सटीक प्रहार आज की स्तिथि पर आ0

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय, बहुत अच्छी रचना ! चिड़ियों की कारागार में बंदी बना है बाज ! इसमें व्यंग्य भरपूर है ! साधुवाद !

    जवाब देंहटाएं
  3. वर्तमान परिवेश पर करारा व्यंग,सार्थक और सटीक, सादर नमन सर

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सार्थक और वर्तमान परिस्थितियों पर आधारित आपकी रचना

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails