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मंगलवार, 29 सितंबर 2020

दोहागीत " प्यार-प्रीत की राह" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 

खाली बैठे रच दिया, मैंने दोहागीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।।
--
ढाई आखर में छिपादुनियाभर का सार।
जो नैसर्गिकरूप सेउमड़े वो है प्यार।।
प्यार नहीं है वासनाये तो है उपहार।
दिल से दिल का मिलन ही, इसका है आधार।।
प्यारभरे इस खेल में, नहीं हार औ जीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।१।
--
माँगे से मिलता नहीं, कभी प्यार का दान।
छिपा हुआ है प्यार मेंजीवन का विज्ञान।
विरह तभी है जागताजब दिल में हो आग।
विरह-मिलन के मूल मेंहोता है अनुराग।।
होती प्यार-दुलार कीबड़ी अनोखी रीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।२।
--
जीवनभर ना रुक सकेबरसाओ वो धार।
सिखलाओ संसार कोक्या होता है प्यार।।
दिल से मत तजना कभीप्रीत-रीत उद्गार।
सारस जीवनभर करेसच्चा-सच्चा प्यार।।
मन की सच्ची लगन हीकहलाती है प्रीत।।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।३।
--
कंकड़-काँटों से भरीप्यार-प्रीत की राह।
बन जाती आसान ये, मन में हो जब चाह।।
लेकर प्रीत कुदाल कोसभी हटाना शूल।
धैर्य और बलिदान से, खिलने लगते फूल।।
सरगम के सुर जब मिलें, बजे तभी संगीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।४।
--

15 टिप्‍पणियां:

  1. अत्यंत भावनात्मक सुंदर दोहे 🙏

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  2. कंकड़-काँटों से भरी, प्यार-प्रीत की राह।
    बन जाती आसान ये, मन में हो जब चाह।।

    प्रेम की सुंदर परिभाषा, जन्मदिन पर बहुत बहुत बधाई, अति सुंदर उपहार !

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर दोहागीत आदरणीय, हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर मनभावन दोहागीत।

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01.10.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  6. जन्मदिन पर मेरी बधाई भी स्वीकारें। अच्छे स्वास्थ्य एवं आनंद मंगल की कामना के साथ सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर दोहागीत । हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं । सादर..

    जवाब देंहटाएं
  8. प्रेमरस में डूबा,प्रेम का मर्म समझाता बहुत ही सुंदर गीत,सादर नमन सर

    जवाब देंहटाएं

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