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गुरुवार, 19 नवंबर 2020

दोहे "छठपूजा त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उगते ढलते सूर्य का, छठपूजा त्यौहार।
कोरोना के काल में, माता हरो विकार।।
 
अपने-अपने नीड़ से, निकल पड़े नर-नार।
सरिताओं के तीर पर, उमड़ा है संसार।।
 
अस्तांचल की ओर जब, रवि करता प्रस्थान।
छठ पूजा पर अर्घ्य तब, देता हिन्दुस्थान।।
 
परम्पराओं पर टिका, अपना भारतवर्ष।
माता जी जय बोलकर, लोग मनाते हर्ष।।
 
षष्टी मइया कीजिए, सबका बेड़ा पार।
मात की अरदास को, उमड़ा है संसार।।
 
छठपूजा के दिवस पर, कर लेना उपवास।
अन्तर्मन से कीजिए, माता की अरदास।।
 
उदित-अस्त रवि को सदा, अर्घ्य चढ़ाना नित्य।
देता है जड़-जगत को, नवजीवन आदित्य।।
 
कठिन तपस्या के लिए, छठ का है त्यौहार।
व्रत पूरा करके करो, ग्रहण शुद्ध आहार।।
 
पूर्वांचल से हो गया, छठ माँ का उद्घोष।
दुनियाभर में किसी का, रहे न खाली कोष।।

8 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 20-11-2020) को "चलना हमारा काम है" (चर्चा अंक- 3891 ) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" शुक्रवार 20 नवंबर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    ....................

    जवाब देंहटाएं
  3. उदित अस्त रवि को सदा,अर्ध्य चढाना नित्य।
    देता है जड़ जगत को, नवजीवन आदित्य।
    बहुत सुंदर दोहे

    जवाब देंहटाएं
  4. पूर्वांचल से हो गया, छठ माँ का उद्घोष।
    दुनियाभर में किसी का, रहे न खाली कोष।।

    -वन्दन... उम्दा प्रस्तुति हेतु साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. छठ पूजा पर बेहतरीन दोहे 🙏🌷🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. आदरणीय शास्त्री जी,
    महापर्व छठ पूजा पर बहुत सुंदर दोहे रचे हैं आपने।

    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं

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