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शनिवार, 7 नवंबर 2020

दोहे "पर्व अहोई-अष्टमी, दिन है कितना खास" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

पर्व अहोई-अष्टमीदिन है कितना खास।

जिसमें पुत्रों के लिएहोते हैं उपवास।।
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कुलदीपक के है लिए, पर्व अहोई खास।
होती अपने तनय पर, माताओं को आस।
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माताएँ इस दिवस पर, करती हैं अरदास।
उनके सुत का हो नहीं, मुखड़ा कभी उदास।।
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सारे जग से भिन्न है, अपना भारत देश।
रहता बारह मास ही, पर्वों का परिवेश।।
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बेटा-बेटी समझ लो, कुल के दीपक आज।
बदलो पुरुष प्रधान का, अब तो यहाँ रिवाज।।
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शिशुओं की किलकारियाँ, गूँजें सबके द्वार।
मिलता बड़े नसीब से, मात-पिता का प्यार।।
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चाहे कोई वार हो, कोई हो तारीख।
संस्कार देते हमें, कदम-कदम पर सीख।।
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जीवन में उल्लास को, भर देते हैं पर्व।
त्यौहारों की रीत पर, हमको होता गर्व।।

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7 टिप्‍पणियां:


  1. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    08/11/2020 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......


    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय शास्त्री जी,
    वाकई कमाल के दोहे हैं। हमारे हिन्दू रीति-रिवाजों पर इस तरह बहुत कम लोगों ने लेखनी चलाई है। बड़े त्यौहारों पर तो अधिकांश लिखा जाता है किन्तु ऐसे महत्वपूर्ण व्रतों पर कवियों की दृष्टि नहीं पहुंच पाती।

    आपकी यशस्विनी लेखनी को प्रणाम 🙏

    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर सार्थक और भावपूर्ण सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  4. अहोई अष्टमी पर शुभकामनाएं ! सार्थक लेखन

    जवाब देंहटाएं

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