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मंगलवार, 24 नवंबर 2020

बालकविता "कौआ होता अच्छा मेहतर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कौआ बहुत सयाना होता।
कर्कश इसका गाना होता।।


पेड़ों की डाली पर रहता।
सर्दी, गर्मी, वर्षा सहता।।


कीड़े और मकोड़े खाता।
सूखी रोटी भी खा जाता।।


श्राद्ध पक्ष में सबको भाता।
पुरखों तक भोजन पहुँचाता।।


सड़े मांस पर यह ललचाता।
काँव-काँव स्वर में चिल्लाता।।


साफ सफाई करता बेहतर।
कौआ होता अच्छा मेहतर।।

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6 टिप्‍पणियां:

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