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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

दोहे "करना सब मतदान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

याचक बनकर आ गये, छली-बली-धनवान।
मत में ताकत है बहुत, करना सब मतदान।।

आयेगा अच्छा समय, जब होगा संयोग।
सोच-समझकर कीजिए, निज मत का उपयोग।।

भाषण में लालित्य हो, अगर भाग्य दे साथ।
कठिनाई कुछ भी नहीं, बनो प्रजा के नाथ।।

जब सूरज में ताव होबढ़ता तब दिनमान।
स्वयं नियोजन से बने, मूरख भी विद्वान।।

भिन्न-भिन्न है मान्यता, भिन्न-भिन्न समुदाय।
अपनाते मत लिए, दल-बल सभी उपाय।।

नहीं रहीं मतपेटियाँ, बाहुबली हैं  दंग।
नवयुग में मतदान के, बदल गये अब ढंग।।

बिना किसी मतपत्र के, गणना करे मशीन।
बना दिये विज्ञान ने, अब उपकरण नवीन।।

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