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बुधवार, 24 अप्रैल 2019

ग़ज़ल "दिल की लगी क्या चीज़ है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दिलज़लो से पूछिएदिल की लगी क्या चीज़ है
लटकाए फिरता है गले में,  वो यार का ताबीज़ है

हमराह तो हमराह सेताउम्र करता है वफा
इश्क में पागल दरिन्दालाँघता दहलीज़ है

राज़ दिल के खोलने को, हमसफर तो चाहिए
ज़िन्दग़ी में एक ऐसे, दोस्त की तजबीज़ है  

चाहता करना भलाई, किन्तु करता तो नहीं
है बहुत कुछ आदमी, लेकिन बना *आजीज़ है

दिल सदा रहता जवां,  प्यार बसता है जहाँ
हुस्न से मत कर मुहब्बत, 'रूप' तो नाचीज़ है 
*आजीज=पराया 

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत लाजवाब शेर हैं सभी ... जहाँ प्यार रहता है वो दिल तो हमेशा जवान ही रहता है ...
    नमस्कार शास्त्री जी ...

    जवाब देंहटाएं
  2. 'रूप' तो नाचीज़ है
    रूप से प्यार तो 'भौतिक' प्यार है. दिल से दिल का प्यार 'रासायनिक'

    बहुत सुंदर गज ल

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह !बेहतरीन आदरणीय
    सादर

    जवाब देंहटाएं

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