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सोमवार, 15 अप्रैल 2019

"गौरैया ने घर बनाया" (समीक्षक-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आसान नहीं है 
बाल साहित्य को रचना 
     कई दिनों पूर्व मुझे डाक से जय सिंह आशावत जी की बालकृति "गौरैया ने घर बनाया" प्राप्त हुई। जो मुझे बहुत अच्छी लगी और मुझे अपने उन दिनों की याद दिला गयी जब मेरे पौत्र-पौत्री छोटे थे और प्रतिदिन ही नये विषय पर नई कविता की माँग कर देते थे। उनकी माँग पूरा करते करते मैं भी बालकवि के रूप में प्रतिष्ठित हो गया था।
    विषयान्तर में न जाते हुए मैं यह कहना चाहता हूँ कि बाल कविता रचने के लिए बचपन में ही वापिस लौटना पड़ता है। बच्चों की मानसिकता को जानने-समझने के लिए खुद को बच्चा बनाना पड़ता है। भाई जय सिंह आशावत ने खुद को बच्चों के चरित्र में ढाला होगा तभी तो इतनी सुन्दर और बालोपयोगी कृति "गौरैया ने घर बनाया" को उन्होंने प्रकाशित करवाया है।
    पेपरबैक में छपी 76 पृष्ठों की इस पुस्तिका का प्रकाशन बोधि प्रकाशन, जयपुर से किया गया है जिसका मूल्य मात्र 100-00 रखा गया है। बालकों की अभिरुचियों को दृष्टिगत रखते हुए कवि ने प्रत्येक रचना के साथ उससे सम्बन्धित रेखाचित्र को भी लगाया है। जिसके कारण इस कृति की उपयोगिता और लोकप्रियता और भी बढ़ गयी है।
     कवि ने “भारत माता” शीर्षक से एक उपयोगी बालगीत से अपनी बालकृति गौरैया ने घर बनाया का श्रीगणेश किया है। जिसकी पंक्तियाँ बहुत ही हृदयग्राही हैं-
“भारतमाता।
भाग्य विधाता।
शत-शत नमन
और वन्दन।
जगद्गुरू के सिंहासन पर
माँ विराजकर।
जग का सारा कलुष मिटा दे
अन्धकार हर।
माँ मेटो तपस-तपन
शत-शत नमन और वन्दन।“
       कवि ने नव वर्ष का स्वागत करते हुए लिखा है-
सुस्वागत नववर्ष का।
मौसम आया हर्ष का।
भैया चुप क्यों बैठे हो
प्रयत्न करो उत्कर्ष का।“
     इस बालकृति का तीसरा बालगीत “गौरैया ने घर बनाया” शीर्षक गीत है जो बहुत ही हृदयग्राही बन पड़ा है-
“गौरैया ने घर बनाया, तिनका-तिनका जोड़कर।
बड़े हुए तो फुर से उड़ गये, बच्चे ममता छोड़कर।

हाथी दादा जब सर्कस में
ऊँची सूँड उठाए।
सब को झुक-झुक करे नमस्ते,
तुमको कितना भाए।
ऐ भैया जी करो नमस्ते
दोनों हाथ जोड़कर।
“गौरैया ने घर बनाया, तिनका-तिनका जोड़कर।“
      बच्चों को रंग-बिरंगी तितलियाँ बहुत लुभाती हैं। मैंने आज तक जितनी भी बालकृतियों की समीक्षा की है उन सबमें तितली की कविता को जरूर पाया है, इस कृति में भी कवि ने तितली शीर्षक से एक बाल गीत का समावेश किया है-
“कितनी रंग-बिरंगी तितली
कुछ छोटी कुछ मोटी तितली
लाल गुलाबी नीली पीली
काली और चितकबरी तितली

बच्चो सी इठलाती तितली
फूलों पर मँडलाती तितली
रोज बोर में खिले फूल जब
मधु पराग ही खाती तितली”
      हैलमेट दुपहिया वाहन के लिए बहुत जरूरी और उपयोगी होता है। कवि ने "हेलमेट" पर अपनी कलम चलातो हुए एक बाल कविता को अपनी कृति में स्थान दिया है-
“हैलमेट के बिना दुपहिया।
नहीं चलाना मेरे भैया।

भाभी को पीछे बैठाना।
लेकिन हेलमेट लगवाना।“
     यद्यपि उल्लू आजकल बहुत कम दिखाई देते हैं लेकिन बच्चों को किताबों और इंटरनेट पर चित्रों में बहुतायत से दिखाई दे जाते हैं और बच्चों को बहुत अच्छे लगते हैं। कवि ने भी "उल्लू" पर अपनी बाल कविता को इस बाल संकलन स्थान दिया है देखिए-
“उल्लू को दिखता ही रात में
दिन तो गुजारे सोकर।
घुप्पु-घुप्पु बोल भयंकर
रहे पेड़ के खोखर।“
     कवि जय सिंह आशावत ने अपनी बालकृति “गौरैया ने घर बनाया” में सपेरा, आम-अनार-अंगूर, सुहानी भेर, नाचे मोर, हाथी, चन्दा, मेंढक, रेल, नीम, कुकुरमुत्ता, कुल्फी आदि विषयों पर सफलतापूर्वक कलम चलाकर सुन्दर बालगीतों और बालकविताओं स्थान दिया है।
      मुझे आशा अपितु विश्वास भी है कि आपकी यह बालकृति बच्चों को ही नहीं अपितु प्रौढ़ पाठकों को भी पसन्द आयेगी। साथ ही यह भी आशा करता हूँ कि “गौरैया ने घर बनाया” नामक आपकी बालकृति समीक्षकों के दृष्टिकोण से भी उपादेय सिद्ध होगी।
      मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ और कामना करता हूँ कि भविष्य आपकी अन्य कृतिया भी प्रकाशित होंगी और पाठकों को पढ़ने को मिलेंगी।

समीक्षक
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक’)
कवि एवं साहित्यकार
टनकपुर-रोड, खटीमा
जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड) 262 308
E-Mail . roopchandrashastri@gmail.com
Website. http://uchcharan.blogspot.com/
मोबाइल-7906360576

1 टिप्पणी:

  1. नमन है कवी की कल्पना को और सुन्दर रचनाओं को ...
    सच कहा है आपने बाल साहित्य रचना आसान नहीं होता ... खुद को उतारना होता है बचपन में ... बधाई है जय सिंह जी को ... और आपको इस समीक्षा के लिए ...

    जवाब देंहटाएं

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