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शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

ग़ज़ल "सितारों का भरोसा क्या, न जाने टूट जायें कब" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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बहारों का भरोसा क्या, न जाने रूठ जायें कब
?
सहारों का भरोसा क्या, न जाने छूट जायें कब?
--
अज़ब हैं रंग दुनिया के, अज़ब हैं ढंग लोगों के
इशारों का भरोसा क्या, न जाने लूट जायें कब?
--
चलाना संभलकर चप्पू, नदी की तेज है धारा,
किनारों का भरोसा क्या, न जाने घूँट जायें कब  
--
न कहना राज-ए-दिल अपना, कभी सूखे सरोवर से
फुहारों का भरोसा क्या, न जाने फूट जायें कब?
--
दमकते रूप का सोना, हमारी आँख का धोखा  
सितारों का भरोसा क्या, न जाने टूट जायें कब?
--

13 टिप्‍पणियां:

  1. सहारों का भरोसा क्या.... बहुत सुंदर। श्रीरामरॉय

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सारगर्भित संदेशों और प्रेरक मार्गदर्शन दिखातीं सुंदर पंक्तियां ।

    जवाब देंहटाएं
  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१०-०४-२०२१) को 'एक चोट की मन:स्थिति में ...'(चर्चा अंक- ४०३२) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।

    जवाब देंहटाएं
  4. ग़ज़ल का एक-एक शेर सीधे दिल पे चोट करने वाला है।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहारों का भरोसा क्या, न जाने रूठ जायें कब?
    सहारों का भरोसा क्या, न जाने छूट जायें कब?
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    अज़ब हैं रंग दुनिया के, अज़ब हैं ढंग लोगों के
    इशारों का भरोसा क्या, न जाने लूट जायें कब?
    --
    चलाना संभलकर चप्पू, नदी की तेज है धारा,
    किनारों का भरोसा क्या, न जाने घूँट जायें कब
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    न कहना राज-ए-दिल अपना, कभी सूखे सरोवर से
    फुहारों का भरोसा क्या, न जाने फूट जायें कब?
    --
    दमकते “रूप” का सोना, हमारी आँख का धोखा
    सितारों का भरोसा क्या, न जाने टूट जायें कब?
    बेहतरीन ग़ज़ल कही है रूप चंद्र शास्त्रीजी मयंक ने -एक तुकबंदी ये भी -

    चुनावी हैं सभी वायदे ,वफ़ा होते नहीं दीखे
    भरोसे का भरोसा क्या ,न जाने टूट जाए कब ,
    kabirakhadabazarmein.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  6. न कहना राज-ए-दिल अपना, कभी सूखे सरोवर से
    फुहारों का भरोसा क्या, न जाने फूट जायें कब?
    वाह बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय गजल

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर ग़ज़ल...

    माता जी की अस्वस्थता के कारण विलम्ब से यहां आने हेतु क्षमा चाहती हूं।

    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत बहुत उम्दा ग़ज़ल आदरणीय हर शेर की अपनी अलग व्यथा है।
    वाह!

    जवाब देंहटाएं
  10. अज़ब हैं रंग दुनिया के, अज़ब हैं ढंग लोगों के
    इशारों का भरोसा क्या, न जाने लूट जायें कब?


    सुन्दर ग़ज़ल......

    जवाब देंहटाएं

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