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गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

दोहे-मूर्ख दिवस "मूरख हैं शिरमौर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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मूर्खदिवस हो रहे, भद्दे आज मजाक।
प्रथा अनोखी देखकर, लोग हुए आवाक।।
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जाने कैसे चल पड़ा, जग में अजब रिवाज।
बुद्धिमान मूरख बने, मूर्ख दिवस पर आज।।
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अच्छे-अच्छों की हुई, हालत आज विचित्र।
उल्लू बन जाना नहीं, मूर्ख दिवस पर मित्र।।
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जो कृतज्ञ होते नहीं, वो मूरख इंसान।
होता उनके साथ में, कोविद का अपमान।।
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गुर्गे पूजा कर रहे, मुर्गे पढ़ें नमाज।
मूरख का होता नहीं, सम्भव कहीं इलाज।।
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अपने भारत देश में, आया कैसा दौर।
पंचायत में ज्ञान की, मूरख हैं शिरमौर।।
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हँसी-ठिठोली की उड़े, कनकइया चहुँ ओर।
मूरखता की हो रही, दुनियाभर में भोर।।
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9 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 02-04-2021) को
    "जूही की कली, मिश्री की डली" (चर्चा अंक- 4024)
    पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया दोहे... गहरा कटाक्ष है इनमें...

    मूर्खदिवस हो रहे, भद्दे आज मजाक।
    प्रथा अनोखी देखकर, लोग हुए आवाक।।

    आदरणीय, क्षमा सहित निवेदन करना चाहूंगी कि इस दोहे में "मूर्खदिवस हो रहे"...में मूर्खदिवस के बाद "पर" लिखना सम्भवतः टंकण त्रुटिवश छूट गया है...

    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  3. मूर्ख दिवस भी रिवाज बन गया, बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!गज़ब का लिखा आपने आदरणीय सर।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  5. हँसी-ठिठोली की उड़े, कनकइया चहुँ ओर।
    मूरखता की हो रही, दुनियाभर में भोर।।

    मूर्ख दिवस पर उम्दा एवं सटीक दोहे...
    सादर नमन आपकी लेखनी को 🌹🙏🌹

    जवाब देंहटाएं
  6. गुर्गे पूजा कर रहे, मुर्गे पढ़ें नमाज।
    मूरख का होता नहीं, सम्भव कहीं इलाज
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर सार्थक एवं सटीक दोहे।

    जवाब देंहटाएं
  7. हँसी-ठिठोली की उड़े, कनकइया चहुँ ओर।
    मूरखता की हो रही, दुनियाभर में भोर।।
    बेहतरीन दोहे 👌👌👌👌

    जवाब देंहटाएं
  8. मूर्ख दिवस पर भी सुंदर दोहों का सृजन,आपको नमन।

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय व्यंग |

    जवाब देंहटाएं

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