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रविवार, 18 अप्रैल 2021

बालकविता "गर्मी को अब दूर भगाओ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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कल तक रुत थी बहुत सुहानी।
अब गर्मी पर चढ़ी जवानी।।

चलतीं कितनी गर्म हवाएँ।
कैसे लू से बदन बचाएँ?
नीबू-पानी को अपनाओ।
लौकी, परबल-खीरा खाओ।।
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खरबूजा-तरबूज मँगाओ।
फ्रिज में ठण्डा करके खाओ।।
गाढ़ा करके दूध जमाओ।
घर में आइसक्रीम बनाओ।।
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कड़ी धूप को कभी न झेलो।
भरी दुपहरी में मत खेलो।।
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ताजा जल से रोज नहाओ।
गर्मी को अब दूर भगाओ।।
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9 टिप्‍पणियां:

  1. बड़ी सरस बाल-कविता रची है आदरणीय शास्त्री जी आपने।

    जवाब देंहटाएं
  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार ( 19-04 -2021 ) को 'वक़्त का कैनवास देखो कौन किसे ढकेल रहा है' (चर्चा अंक 4041) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर संदेशपूर्ण,सामयिक बाल कविता ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर रचना सादर

    जवाब देंहटाएं
  5. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार(4-7-21) को "बच्चों की ऊंगली थामें, कल्पनालोक ले चलें" (चर्चा अंक- 4115) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  6. आदरणीय, बाल - कविता के द्वारा सार्थक संदेश देने के लिए साधुवाद!--ब्रजेंद्रनाथ

    जवाब देंहटाएं

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