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बुधवार, 21 अप्रैल 2021

गीत "मन की बात नहीं कर पाया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने जीवन साथी से जो, मन की बात नहीं कर पाया।।

दीन-दुखी के मन की पीड़ा, कैसे वो हर पायेगा।।

सूखे जीवन-उपवन को जो, नहीं नीर से भर पाया।

नयी पौध को वो खेतों में वो, अब कैसे रोपायेगा।।

--

शोर मचाती ओछी गागर,

सूख गया आँखों का सागर,

धोखा देता है सौदागर,

हालत हुई खराब वतन की,

झोली खाली जन-गण-मन की,

गैंडा चिड़िया के बच्चे को, क्या उड़ना सिखलायेगा।

नयी पौध को वो खेतों में वो, अब कैसे रोपायेगा।।

--

हुआ अन्नदाता बेघर है,

सिंहासन हो गया निडर है,

अब वसन्त में भी पतझर है,

लोकतन्त्र है राजतन्त्र सा,

चलता मानव आज यन्त्र सा,

पथ से भटका हुआ मसाफिर, कैसे मंजिल पायेगा।

नयी पौध को वो खेतों में वो, अब कैसे रोपायेगा।।

 --

दशा-दिशा बदली-बदली है,

नवयुग की सरगम पगली है,

पानी में प्यासी मछली है,

दूषित मन है दूषित तन है,

संकट में अब जन-जीवन है,

नाविक जब आवारा हों तो, नौका कौन बचायेगा।

नयी पौध को वो खेतों में वो, अब कैसे रोपायेगा।।

--


10 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. दिल भर आया शास्त्री जी आपकी इस काव्याभिव्यक्ति को पढ़कर।

    जवाब देंहटाएं
  3. पथ से ही जो भटक गया हो वह मंजिल कैसे पा सकता है, वाकई आज के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे, पर हर रात के बाद सवेरा आता है

    जवाब देंहटाएं
  4. दशा-दिशा बदली-बदली है,

    नवयुग की सरगम पगली है,

    पानी में प्यासी मछली है,

    दूषित मन है दूषित तन है,

    संकट में अब जन-जीवन है,

    नाविक जब आवारा हों तो, नौका कौन बचायेगा।

    नयी पौध को वो खेतों में वो, अब कैसे रोपायेगा।।..बिलकुल सही कहा आपने आदरणीय शास्त्री जी ।
    आप अपना विशेष ध्यान रखें, हम सब की शुभकामनाएं आप के साथ हैं ।

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 22-04-2021 को चर्चा – 4,044 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर। आपको जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ हो यहीं शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह! बहुत ही सुंदर सृजन आदरणीय सर।
    सादर प्रणाम

    जवाब देंहटाएं
  8. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार(29 -6-21) को "मन की बात नहीं कर पाया"(चर्चा अंक- 4110 ) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  9. सुंदर हृदय स्पर्शी सृजन।
    अभिनव सार्थक।

    जवाब देंहटाएं

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