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बहुत बढ़िया दोहे... गहरा कटाक्ष है इनमें...
जवाब देंहटाएंमूर्खदिवस हो रहे, भद्दे आज मजाक।
प्रथा अनोखी देखकर, लोग हुए आवाक।।
आदरणीय, क्षमा सहित निवेदन करना चाहूंगी कि इस दोहे में "मूर्खदिवस हो रहे"...में मूर्खदिवस के बाद "पर" लिखना सम्भवतः टंकण त्रुटिवश छूट गया है...
सादर,
डॉ. वर्षा सिंह
मूर्ख दिवस भी रिवाज बन गया, बहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंवाह!गज़ब का लिखा आपने आदरणीय सर।
जवाब देंहटाएंसादर
हँसी-ठिठोली की उड़े, कनकइया चहुँ ओर।
जवाब देंहटाएंमूरखता की हो रही, दुनियाभर में भोर।।
मूर्ख दिवस पर उम्दा एवं सटीक दोहे...
सादर नमन आपकी लेखनी को 🌹🙏🌹
गुर्गे पूजा कर रहे, मुर्गे पढ़ें नमाज।
जवाब देंहटाएंमूरख का होता नहीं, सम्भव कहीं इलाज
वाह!!!
बहुत ही सुन्दर सार्थक एवं सटीक दोहे।
हँसी-ठिठोली की उड़े, कनकइया चहुँ ओर।
जवाब देंहटाएंमूरखता की हो रही, दुनियाभर में भोर।।
बेहतरीन दोहे 👌👌👌👌
मूर्ख दिवस पर भी सुंदर दोहों का सृजन,आपको नमन।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत सुन्दर सराहनीय व्यंग |
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