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बुधवार, 31 मार्च 2021

दोहे "दोहों में कुछ ज्ञान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


माता जी ने है दियामुझे छन्द का दान।
इसीलिए हूँ बाँटतादोहों में कुछ ज्ञान।१।
--
छोटी-छोटी बात परकरते यहाँ विवाद।
देते बालक-बालिकाकुल को बहुत विषाद।२।
--
जिसका नहीं इलाज कुछऐसा है ये रोग।
बिना विचारे खुदकुशीकर लेते हैं लोग।३।
--
कायरता है खुदकुशीसमझ अरे नादान।
कुदरत ने इंसान कोदिया बुद्धि का दान।४।
--
लेना अपने फैसलेसोचसमझ कर आप।
एक जरा सी चूक सेछा जाता सन्ताप।५।
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जान-बूझ कर मत करोगलती बारम्बार।
शिक्षा लेकर भूल सेकरना भूल सुधार।६।
--
सबके लिए खुले हुएस्वर्ग-नर्क के द्वार।
कर्मयोनि मिलती नहींजग में बारम्बार।७।
--
गघे नहीं खाते जिसेतम्बाकू वो चीज।
खान-पान की मनुज कोबिल्कुल नहीं तमीज।८।
--
रोग कैंसर का लगेसमझ रहे हैं लोग।
फिर भी करते जा रहेतम्बाकू उपयोग।९।
--
तम्बाकू को त्याग दोहोगा बदन निरोग।
जीवन में अपनाइएभोग छोड़कर योग।१०।
--
जग सूना पानी बिनाजल जीवन आधार।
धरती में जल स्रोत काहै सीमित भण्डार।११।
--
जितनी ज्यादा आ रहीआबादी की बाढ़।
उतना ही तपने लगाजेठ और आषाढ़।१२।
--
घटते ही अब जा रहेधरती पर से वृक्ष।
सूख गया है इसलिएवसुन्धरा का वक्ष।१३।
--
लू के झाँपड़ झेल करखा सूरज की धूप।
अमलतास का हो गयासोने जैसा रूप।१४।
--
झूमर जैसे लग रहेअमलतास के फूल।
छाया देता पथिक कोमौसम के अनुकूल।१५।
--
होता है धन-माल सेकोई नहीं सनाथ।।
सिर पर होना चाहिएमाता जी का हाथ।१६।
--
जिनके सिर पर है नहींमाँ का प्यारा हाथ।
उन लोगों से पूछिएकहते किसे अनाथ।१७।
--
उपयोगी पुस्तक नहींबस्ते का है भार।
बच्चों को कैसे भलाहोगा इनसे प्यार।१८।
--
अभिरुचियाँ समझे बिनापौध रहे हैं रोप।
नन्हे मन पर शान सेदेते कुण्ठा थोप।१९।
--
जितने धरती पर हुएराजारंक-फकीर।
ब्रह्मलीन सबका हुआभौतिक तत्व शरीर।२०।
--
पल-पल में है बदलताकाया का ये रूप,
ढल जायेगी एक दिनरंग-रूप की धूप।२१।
--
ग्रह और नक्षत्र कीचाल रही है वक्र।
आने-जाने का सदाचलता रहता चक्र।२२।
--
अगले पल क्या घटेगाकुछ भी नहीं गुमान।
अमर समझ कर जी रहाहर जीवित इंसान।२३।
--
काम करो दिन में सदारातों को विश्राम।
संघर्षों से जीत लोजीवन का संग्राम।२४।
--
नदियाँ-सूरज-चन्द्रमादेते ये पैगाम।
नित्य-नियम से कीजिएअपना सारा काम।२५।
--
नहीं मिलेगी हाट मेंइन्सानियत-तमीज।
बाँध लीजिए कण्ठ मेंकर्मों का ताबीज।२६।
--
जगतनियन्ता का करोसच्चे मन से ध्यान।
बिना वन्दना के नहींमिलता है वरदान।२७।
--
उच्चारण सुधरा नहींबना नहीं परिवेश।
अँग्रेजी के जाल मेंजकड़ा सारा देश।२८।
--
आज समय की माँग हैदो परिवेश सुधार।
कर्तव्यों के साथ मेंमिलें उचित अधिकार।२९।
--
गौमाता भूखी मरेश्वान खाय मधुपर्क।
समझो ऐसे देश काबेड़ा बिल्कुल गर्क।३०।
--
चरागाह में बन गयेऊँचे भव्य मकान।
देख दुर्दशा गाँव कीहै किसान हैरान।३१।
--
चोकर-चारा घास केआसमान पर दाम।
गाय-भैंस को पालनानहीं सरल है काम।३२।
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बेच रहे हैं दूध कोअब सारे ग्राणीण।
दही और नवनीत कीआशाएँ हैं क्षीण।३३।
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कहनेभर को रह गयाअपना देश महान।
गौशालाओं को नहींदेता कोई दान।३४।
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माली ही खुद लूटतेअब तो बाग-बहार।
आपाधापी का हुआआभासी संसार।३५।
--

10 टिप्‍पणियां:

  1. लाजवाब दोहे..अति सुन्दर सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  2. एक साथ पैंतीस दोहे.... सभी प्रेरक और अतिउत्तम...

    आपकी लेखनी को प्रणाम आदरणीय 🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. लाजवाब दोहों की छोटी सी खान का मुँह खोल दिया जैसे आपने ...
    बहुत उत्तम दोहे ...

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01-04-2021 को चर्चा – 4,023 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं

  5. पर्यावरण सचेत स्वास्थ्य वर्धक दोहे शास्त्री जी के बेधड़क सब कह जाते हैं राजनीति समाज नीति अब कुछ बेहतरीन दोहावली की उच्चारण के तहत -
    पल-पल में है बदलता, काया का ये रूप,
    ढल जायेगी एक दिन, रंग-रूप की धूप।२१।
    --
    ग्रह और नक्षत्र की, चाल रही है वक्र।
    आने-जाने का सदा, चलता रहता चक्र।२२।
    --
    अगले पल क्या घटेगा, कुछ भी नहीं गुमान।
    अमर समझ कर जी रहा, हर जीवित इंसान।२३।
    अध्यात्म भी मिलता है यहां नीति भी -
    चार वेद छः शास्त्र में बात लिखी हैं दोय ,दुःख दीन्हें दुःख होय है सुख दीन्हें सुख होय.बधाई सशक्त अंक के लिए।

    जवाब देंहटाएं
  6. सुंदर और सार्थक अनुभूतियों से सजे दोहे,आपको सादर नमन ।

    जवाब देंहटाएं

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