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सोमवार, 1 नवंबर 2021

दोहे "रहे साथ में शारदे, गौरी और गणेश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


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करते हमें निरोग जो, हरते हैं अवसाद।
उन धन्वन्तरि देव को, आज कीजिए याद।।
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धनतेरस के पर्व परसजे हुए बाज़ार।
घर में अपने ला रहेलोग नये उपहार।।
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झालर-दीपों से सजेंआज सभी के नीड़।
धरती पर पसरी हुईतारों की है भीड़।।
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चलकर आई धरा पर, चन्दा की बारात।
इसीलिए आकाश में, हुई अँधेरी रात।।
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दीवाली पर हो रहाखुशियों का इजहार।
मिष्ठानों से हैं सजेआज सभी बाजार।।
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रहे साथ में शारदेगौरी और गणेश।
आती है जब सम्पदातब सुधरे परिवेश।।
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उल्लू बन जाना नहींपाकर द्रव्य अपार।
धन-दौलत के साथ होमेधा का उपहार।।
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बैरभाव को छोड़कर, बाँटो सबको प्यार।
धनतेरस पर दीजिए, कुछ अभिनव उपहार।।
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3 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (2-11-21) को "रहे साथ में शारदे, गौरी और गणेश" (चर्चा अंक 4235) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. धनतेरस का सुंदर वर्णन!शुभकामनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  3. धन्वंतरि देव और धन तेरस पर सुंदर सृजन।
    धन तेरस की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं

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