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सोमवार, 27 जुलाई 2020

दोहे "कौन सुखी परिवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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रिश्तों-नातों से भरा, सारा ही संसार।
प्यार परस्पर हो जहाँ, वो होता परिवार।।
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सम्बन्धों में हों जहाँ, छोटी-बड़ी दरार।
धरती पर कैसे कहें, कौन सुखी परिवार।।
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एक दूसरे के लिए, रहो सदैव उदार।
प्यार सुखी परिवार का, होता है आधार।।
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अपने कुनबे में करो, कभी न झूठा प्यार।
सबके प्रति परिवार में, हों सच्चे उद्गार।।
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कोई भी परिवार हो, कोई देश-समाज।
अवसर के अनुकूल ही, वहाँ बजाओ साज।।
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एक-नेक रहता वही, दुनिया में परिवार।
जहाँ दिलों में हों भरे, सबके नेक विचार।।
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8 टिप्‍पणियां:

  1. इन दोहों में मनुष्य के पारिवारिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए कई प्रेरणादायक सन्देश हैं।रचनाकार आदरणीय शास्त्रीजी को हार्दिक बधाई और बहुत -बहुत शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  2. सादर नमस्कार,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (२८-७-२०२०) को
    "माटी के लाल" (चर्चा अंक 3776)
    पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है

    जवाब देंहटाएं
  3. इस आदर्श पर सब चलें तो दुनिया स्वर्ग ही हो जाए... इस उपयोगी सीख पर चलने की बड़ी आवश्यकता है। सादर प्रणाम।
    अपने कुनबे में करो, कभी न झूठा प्यार।
    सबके प्रति परिवार में, हों सच्चे उद्गार।

    जवाब देंहटाएं
  4. रिश्तों-नातों से भरा, सारा ही संसार।
    प्यार परस्पर हो जहाँ, वो होता परिवार।।

    बहुत ही सुंदर दोहे

    जवाब देंहटाएं
  5. सादर नमस्कार ! परिवार को त्याग और प्रेम के धरातल पर स्थापित करने का सन्देश देते बहुत सुन्दर और सटीक दोहे !
    एक-नेक रहता वही, दुनिया में परिवार।
    जहाँ दिलों में हों भरे, सबके नेक विचार।।--ब्रजेन्द्र नाथ

    जवाब देंहटाएं

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