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रविवार, 5 जुलाई 2020

दोहे "गुरुवर का सम्मान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


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गुरूपूर्णिमा पर करें, गुरूजनों को याद।।
जीवनभर चलता रहे, गुरू-शिष्य सम्वाद।।
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जिसका है भगवान से, अधिक जगत में मान।
वो ही अब है बाँटता, पैसा लेकर ज्ञान।।
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नहीं रहे अब वो गुरू, नहीं रहे वो शिष्य।
दौलत के ऊपर टिका, सबका आज भविष्य।।
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खाली पेट न सूझता, गुरू और गोविन्द।
सूख गया तालाब जब, मुरझाया अरविन्द।।
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गुरू पूर्णिमा पर सभी, गुरुवर करें विचार।
बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।।
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जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान।
घटा हुआ क्यों विश्व में, गुरुवर का सम्मान।।
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वेद-शास्त्र गुरुदेव की, महिमा करें बखान।
नारायण से मिलन का, गुरू स्वयं सोपान।। 
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4 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार (06-07-2020) को 'नदी-नाले उफन आये' (चर्चा अंक 3754)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    -रवीन्द्र सिंह यादव

    जवाब देंहटाएं
  2. सुन्दर और सार्थक सृजन .

    जवाब देंहटाएं

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