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गुरुवार, 30 जुलाई 2020

दोहे "जंगी यान रफेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


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फ्रांस देश से आ गया, जंगी यान रफेल।
चीन-पाक की नाक में, अब पड़ गयी नकेल।।
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अब ड्रैगन-नापाक का, भन्ना रहा दिमाग।
दिल पर इनके लोटने, आज लगे हैं नाग।।
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कूटनीति का है नहीं, अपना कहीं जवाब।
गाल बजाने से कुटिल, कैसे बने नवाब।।
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ओढ़ लबादा शेर का, वीर न हो शृंगाल।
पहचाने जाते यहाँ, करतब से ऐमाल।।
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उपमा का अपनी नहीं, कोई भी उपमान।
गीदड़ भभकी से नहीं, डरता हिन्दुस्तान।।
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शेष बचे कश्मीर को, लेगा हिन्दुस्तान।
टुकड़ों में बँट जायगा, पापी पाकिस्तान।।
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कठिन समय को देखकर, करे किनारा चीन।
भारत निज भू भाग को, जबरन लेगा छीन।।
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1 टिप्पणी:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार (०१-०८ -२०२०) को 'बड़े काम की खबर'(चर्चा अंक-३७८०) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं

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