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मंगलवार, 19 जनवरी 2021

गीत "आज हा-हा कार सा है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

--
कल्पनाएँ डर गयी हैं
,
भावनाएँ मर गयीं हैं,
देख कर परिवेश ऐसा।
हो गया क्यों देश ऐसा??
 --
पक्षियों का चह-चहाना ,
लग रहा चीत्कार सा है।
षट्पदों का गीत गाना ,
आज हा-हा कार सा है।
गीत उर में रो रहे हैं,
शब्द सारे सो रहे हैं,
देख कर परिवेश ऐसा।
हो गया क्यों देश ऐसा??
 --
एकता की गन्ध देता था,
सुमन हर एक प्यारा,
विश्व सारा एक स्वर से,
गीत गाता था हमारा,
कट गये सम्बन्ध प्यारे,
मिट गये अनुबन्ध सारे ,
देख कर परिवेश ऐसा।
हो गया क्यों देश ऐसा??
-- 
आज क्यों पागल,
स्वदेशी हो गया है?
रक्त क्यों अपना,
विदेशी हो गया है?
पन्थ है कितना घिनौना,
हो गया इन्सान बौना,
देख कर परिवेश ऐसा।
हो गया क्यों देश ऐसा??
 --
आज भी लोगों को,
पावस लग रही है,
चाँदनी फिर क्यों,
अमावस लग रही है?
शस्त्र लेकर सन्त आया,
प्रीत का बस अन्त आया,
देख कर परिवेश ऐसा।
हो गया क्यों देश ऐसा??

--

 

9 टिप्‍पणियां:

  1. वर्तमान पर सटीक चिंतन
    ऊपर से लेकर सब एक सा
    फिर कौन सुने

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय शास्त्री जी,
    रगों में प्रवाहित रक्त के प्रवाह को एकदम तेज़ कर देने वाले इस समसामयिक यथार्थवादी गीत ने मन को चिंतन के भंवर में धकेल दिया है। सचमुच स्वयं देवी सरस्वती का वास ह आपकी लेखनी में, आपकी प्रज्ञा में... आपको नमन है मेरा 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  3. कृपया "वास है" पढ़ें । धन्यवाद 🙏

    जवाब देंहटाएं
  4. पक्षियों का चह-चहाना ,
    लग रहा चीत्कार सा है।
    षट्पदों का गीत गाना ,
    आज हा-हा कार सा है।
    गीत उर में रो रहे हैं,
    शब्द सारे सो रहे हैं,
    देख कर परिवेश ऐसा।
    हो गया क्यों देश ऐसा??

    शत प्रतिशत सत्य की सटीक, सुंदर काव्यात्मक भावाभिव्यक्ति...
    वर्तमान परिदृश्य यही है...
    सादर नमन 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

    जवाब देंहटाएं
  5. एकता की गन्ध देता था,
    सुमन हर एक प्यारा,
    विश्व सारा एक स्वर से,
    गीत गाता था हमारा,
    कट गये सम्बन्ध प्यारे,
    मिट गये अनुबन्ध सारे ,
    देख कर परिवेश ऐसा।
    हो गया क्यों देश ऐसा??


    समसामयिक परिवेश पर सटीक अभिव्यक्ति.. आभार....

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह!बहुत ही सुंदर सृजन सर।
    सादर

    जवाब देंहटाएं

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