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सोमवार, 25 जनवरी 2021

देशगीत "गणतंत्र महान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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नया वर्ष स्वागत करता है,
पहन नया परिधान।
सारे जग से न्यारा, 

अपना है गणतंत्र महान॥
--
ज्ञान गंग की बहती धारा,
चन्दा-सूरज से उजियारा।
आन-बान और शान हमारी,
संविधान हम सबको प्यारा।
प्रजातंत्र पर भारत वाले,
करते हैं अभिमान।
सारे जग से न्यारा, 
अपना है गणतंत्र महान॥
--
शीश मुकुट हिमवान अचल है,
सुंदर -सुंदर ताजमहल है।
गंगा - यमुना और सरयू का,
पग पखारता पावन जल है।
प्राणों से भी मूल्यवान है,
हमको हिन्दुस्तान। 
सारे जग से न्यारा, 
अपना है गणतंत्र महान॥
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स्वर भर कर इतिहास सुनाता,
महापुरुषों से इसका नाता।
गौतम-गांधीदयानंद की,
प्यारी धरती भारतमाता।
यहाँ हुए हैं पैदा नानक,
रामकृष्ण-भगवान।
सारे जग से न्यारा, 
अपना है गणतंत्र महान॥
--

8 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार २६ जनवरी २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं !

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत उत्कृष्ट देशभक्ति गीत
    नमन आदरणीय🙏

    जवाब देंहटाएं
  4. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-1-21) को "यह गणतंत्र दिवस हमारे कर्तव्यों के नाम"(चर्चा अंक-3958) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  5. देशभक्ति से ओतप्रोत सुन्दर रचना..सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  6. देशभक्ति भाव से पूरित सुन्दर सृजन । गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  7. देशभक्ति के भाव से परिपूर्ण प्रेरक रचना। साधुवाद!--ब्रजेंद्रनाथ

    जवाब देंहटाएं
  8. सर कुछ कविताएं और स्वागत गीत वीरांगना महारानी अवन्ति बाई लोधी पर भी लिखो
    आपका बेटा शैलेन्द्र सिंह लोधी राजपूत जी हीरापुरा गोरमी जिला भिण्ड मप्र 7987954307

    जवाब देंहटाएं

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