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बुधवार, 27 जनवरी 2021

दोहे "टिप्पणी और पसन्द" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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मुखपोथी पर हो रही, लाइव की बरसात।
बिना माँग के कर रहे, सब अपना निर्यात।।
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आड़ा-तिरछा हो भले, शब्दों का आकार।
गढ़ते मन के पात्र को, बनकर सभी कुम्हार।।
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इस लाइव के फेर में, लिखना-पढ़ना बन्द।
कहाँ-कहाँ पर अब करें, टिप्पणी और पसन्द।।
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एक-एक घण्टे करें, काव्यपाठ कविराज।
मुखपोथी को चाहिए, करना सही इलाज।।
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चाहे जो पढ़ते रहो, टोकेगा अब कौन।
वाह-वाह करते सभी, वाणी को कर मौन।।
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कल तक जो गुमनाम थे, उन्हें गये सब जान।
मुखपोथी ने दे दिया लाइव का वरदान।।
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कोनोना के काल में, लाइव का उपहार।
वाचन-भाषण में करो, सुनकर स्वयं सुधार।।

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3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 28.01.2021 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर सारगर्भित दोहे समसामयिक दृश्य को रेखांकित करते हुए..

    जवाब देंहटाएं

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