"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

रविवार, 24 जनवरी 2021

दोहे "खरपतवार अनन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
होगा कुहरे का नहीं, जब तक नभ से अन्त।
तब तक आयेगा नहीं, खिलता हुआ बसन्त।।
--
निर्धन दुख को झेलते, सुख से हैं सामन्त।
कूड़ा-करकट बीनते, श्याम सलोने कन्त।।
--
रुकता थकता है नहीं, चलता चक्र अनन्त।
जग में आवागमन का, होता कभी न अन्त।।
--
खूब कमाई कर रहे, बाबा और महन्त।
थोड़े से ही हैं बचे, अब दुनिया में सन्त।।
--
जन्मजात होते नहीं, सन्त और बलवन्त।
गुरु की हो जिस पर कृपा, वो बनता गुणवन्त।।
--
दल के दल-दल में उगी, खरपतवार अनन्त।
गली-हाट में बिक रहे, राजनीति के सन्त।।
--
गये नहीं जो बाग में, देखे नहीं बसन्त।
आज किसानों के वही, बन बैठे हैं सन्त।।

--

5 टिप्‍पणियां:

  1. दल के दल-दल में उगी, खरपतवार अनन्त।
    गली-हाट में बिक रहे, राजनीति के सन्त।।
    --
    गये नहीं जो बाग में, देखे नहीं बसन्त।
    आज किसानों के वही, बन बैठे हैं सन्त।।


    समसामयिक यथार्थवादी दोहे...
    आदरणीय, आपकी लेखनी को नमन 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार 25 जनवरी 2021 को 'शाख़ पर पुष्प-पत्ते इतरा रहे हैं' (चर्चा अंक-3957) पर भी होगी।--
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. दल के दल-दल में उगी, खरपतवार अनन्त।
    गली-हाट में बिक रहे, राजनीति के सन्त।।
    --
    गये नहीं जो बाग में, देखे नहीं बसन्त।
    आज किसानों के वही, बन बैठे हैं सन्त।।

    ..बहुत सटीक

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रणाम शास्त्री जी, आपने कटु सत्रू कह द‍िया...क‍ि


    खूब कमाई कर रहे, बाबा और महन्त।
    थोड़े से ही हैं बचे, अब दुनिया में सन्त।।..वाह

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह!बेहतरीन सृजन आदरणीय सर।
    सादर

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails