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शनिवार, 16 जनवरी 2021

दोहे "वैज्ञानिक इस देश के धन्यवाद के पात्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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दुनिया में उपचार की, लगी हुई है होड़।
कोरोना का आ गया, भारत में अब तोड़।।
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रचे-बसे हैं देश में, कण-कण में रघुनाथ।
उनके पुण्य-प्रताप से, लगी सफलता हाथ।।
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कोरोना के काल में, डरे हुए थे लोग।
आया टीकाकरण का, अब तो सुखद-सुयोग।।
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उन्मूलन में रोग के, करो सभी सहयोग।
बिना काल अब देश में, नहीं मरेंगे लोग।।
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कर ले कितना चीन से, गठबन्धन नेपाल।
लेकिन भारत के बिना, गले न उसकी दाल।।
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मोदी जी की नीतियाँ, भरने लगीं छलाँग।
वैकसीन के लिए सब, करते हमसे माँग।।
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कोविड रोग-विनाश का, टीका ही है मात्र।
वैज्ञानिक इस देश के, धन्यवाद के पात्र।।

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11 टिप्‍पणियां:

  1. प्रणाम शास्त्री जी,आपकी दोहावली तो हमारे ल‍िए प्रेरणास्रोत है

    जवाब देंहटाएं
  2. समसामयिक सटीक दोहे, शास्त्री जी। विज्ञान का सदुपयोग मानवता का हित, दुरूपयोग विनाश।

    जवाब देंहटाएं
  3. आदरणीय शास्त्री जी,
    दोहों के माध्यम से आपने वर्तमान परिदृश्य का सुंदर चित्रण किया है। साधुवाद 🙏
    वास्तव में कोरोना महामारी का वैक्सीन भारत में निर्मित किया जाना हम सभी भारतियों के लिए गर्व का विषय है।
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  4. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार 18 जनवरी 2021 को 'यह सरसराती चलती हाड़ कँपाती शीत-लहर' (चर्चा अंक-3950) पर भी होगी।--
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  5. कोविड रोग-विनाश का, टीका ही है मात्र।
    वैज्ञानिक इस देश के, धन्यवाद के पात्र।।

    बहुत सटीक एवं सार्थक दोहे...
    सचमुच हमें अपने वैज्ञानिकों पर गर्व करना चाहिए।
    सादर नमन 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

    जवाब देंहटाएं
  6. घाव पर फहा लगाते सुंदर आशावादी दोहे।

    सादर‌

    जवाब देंहटाएं

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