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रविवार, 21 मार्च 2021

दोहे "कविताओँ का मर्म" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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एकल कवितापाठ का
अपना ही आनन्द।
रोज़ सृजन को कीजिएकरके कमरा बन्द।१।
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करके खुद ही टिप्पणीरोज निभाना धर्म।
तब आयेगा समझ मेंकविताओँ का मर्म।२।
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टिप्पणियों के ढेर सेबन जाता आधार।
अपनी रचना बाँचकरमिलते हैं उपहार।३।
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आम आदमी पिस रहामजे लूटता खास।
मँहगाई की मार सेमेला हुआ उदास।४।
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प्रियतम भूला आपकोआप कर रहे याद।
पत्थर से करना नहींकोई भी फरियाद।५।
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कम शब्दों के मेल सेदोहा बनता खास।
सरस्वती जी का रहेसबके उर में वास।६।
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ठगती सबको लालसामानव हों या देव।
लालच बुरी बलाय हैइससे बचो सदैव।७।
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एक-एक कर सभी कीखोल रहे जो पोल।
सही राह बतला रहेगुणीजनों के बोल।८।
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देश खोखला कर दियाजीना किया हराम।
आम आदमी हो रहेफोकट में बदनाम।९।
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फिर से पैदा हो गयेबाबर-औरंगजेब।
जिनमें उनकी ही तरहभरे हुए हैं ऐब।१०।
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वाणी में ही निहित हैंसभी तरह के बोल
लेकिन कड़वे बोल से, विष का बनता घोल।११।
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सम्बन्धों की आड़ मेंवासनाओं का खेल।
करके झूठी प्रशंसाकरते तन का मेल।१२।
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आम आदमी पिस रहाखास हो रहे मस्त।
जाली नोटों ने करीयहाँ व्यवस्था ध्वस्त।१३।
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सामाजिक परिवेश मेंआयी है अब मोच।
कुछ लोगों की हो गईकितनी गन्दी सोच।१४।
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पलकों पर ठहरा हुआ. इन्तज़ार का जोश।
बिना पिये जो हृदय कोकर देती मदहोश।१५।


8 टिप्‍पणियां:

  1. करके खुद ही टिप्पणी, रोज निभाना धर्म।
    तब आयेगा समझ में, कविताओँ का मर्म।

    बहुत सही आदरणीय...अपनी रचना का स्वमूल्यांकन करना सभी के वश में नहीं रहता...
    प्रायः आत्ममुग्धता हावी हो जाती है, और कवि अपने लिखे काव्य को श्रेष्ठतम मान कर पतनोन्मुखी हो जाता है।
    बहुत बढ़िया प्रेरक दोहों के लिए साधुवाद 🙏
    विश्व कविता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंंह

    जवाब देंहटाएं
  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार ( 22-03 -2021 ) को पत्थर से करना नहीं, कोई भी फरियाद (चर्चा अंक 4013) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह!सर ,बहुत खूब । सीख देते हुए दोहे ।

    जवाब देंहटाएं
  4. ठगती सबको लालसा----।
    मयंक जी बहुत सुंदर एवं यथार्थ चित्रण।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया और प्रेरक दोहे ।

    जवाब देंहटाएं

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