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मंगलवार, 2 मार्च 2021

गीत "तितली है फूलों से मिलती" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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बौरायें हैं सारे तरुवर
पहन सुमन के हार।
मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।
--
गदराई है डाली-डाली,
चारों ओर सजी हरियाली,
कुहुक रही है कोयल काली
नीम-बेर-बेलों पर भी आया है नया निखार।
मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।
--
हँसते गेहूँसरसों खिलती
तितली भी फूलों से मिलती,
पवन बसन्ती सर-सर चलती
सबको गले मिलाने आयाहोली का त्यौहार।
मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।
--
निर्मल जल की धारा बहती,
कभी न थकती चलती रहती,
नदिया तालाबों से कहती,
"चरैवेति" पर टिका हुआ है सारा ही संसार।
मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।
--

12 टिप्‍पणियां:

  1. समसामयिक बसंती दृश्यों का मनोहारी चित्रण..

    जवाब देंहटाएं
  2. निर्मल जल की धारा बहती,
    कभी न थकती चलती रहती,
    नदिया तालाबों से कहती,
    "चरैवेति" पर टिका हुआ है सारा ही संसार।
    मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।

    प्रकृति में निबद्ध जीवन संदेश को रेखांकित करती आपकी इस अत्यंत सुंदर वासंतिक रचना के लिए आपको सादर नमन 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

    जवाब देंहटाएं
  3. "चरैवेति" पर टिका हुआ है सारा ही संसार।
    मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।

    ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद की ऋचाओं पर आधारित वैदिक कर्मकांडों से संबंधित ग्रंथ है। उसमें एक कथा का उल्लेख है इक्ष्वाकुवंशीय राजा हरिश्चन्द्र और उनके पुत्र रोहित से संबंधित। उस कथा में पांच श्लोकों का उल्लेख है, जिनके अंतिम चरण का अंत “चरैवेति” से होता है, चरैवेति यानी चलते रहो, चलते रहो...सचमुच चरैवेति अर्थात् गति पर सारा संसार टिका है। सूर्य, चंद्रमा, धरत किसी को भी पल भर विश्राम नहीं। इनके रुकने का अर्थ है प्रलय...

    तितली और फूलों के माध्यम से व्यक्त यह अद्भुत गीत जिसमें प्रकृति भी है, लय, छंद भी है, प्रेम भी है और आध्यात्म भी... बहुत सुंदर और हृदयग्राही है।
    साधुवाद आदरणीय 🙏

    हार्दिक शुभकामनाओं सहित,
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  4. बसंत का बहुत ही सुन्दर चित्रण मनोहारी रचना

    जवाब देंहटाएं
  5. प्रकृति के सौंदर्य को निखारती सुन्दर कविता, मुग्ध करती है नमन सह।

    जवाब देंहटाएं
  6. प्रकृति के मोहक दृश्यों को दर्शाती कविता....बहुत सुन्दर....

    जवाब देंहटाएं
  7. ऋतु परिवर्तन के सुंदर मोहक दृश्य, साथ ही गतिमान रहने का संदेश। बहुत सुंदर रचना। सादर प्रणाम।

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  8. बसंती मौसम की मनभावन छवि

    जवाब देंहटाएं
  9. --
    बौरायें हैं सारे तरुवर, पहन सुमन के हार।
    मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।
    --
    गदराई है डाली-डाली,
    चारों ओर सजी हरियाली,
    कुहुक रही है कोयल काली,
    नीम-बेर-बेलों पर भी आया है नया निखार।
    मोह रहा है सबके मन को बासन्ती शृंगार।।
    --
    बहुत सुंदर
    मनभावन।
    सादर नमन।

    जवाब देंहटाएं
  10. प्रकृति का सुंदर चित्रण करती मनमोहक सृजन आदरणीय सर,सादर नमन

    जवाब देंहटाएं

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