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सोमवार, 8 मार्च 2021

दोहे "नारी की आवाज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

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लीक पीटने का कहींछूट न जाय रिवाज।
मना रहा है इसलिएमहिला-दिवस समाज।।
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जग में अब भी हो रहेमौखिक जोड़-घटाव।
कैसे होगा दूर फिरलिंग-भेद का भाव।
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नारी की अपनी अलगकैसे हो पहचान।
ढोती है वो उमर भर, साजन का उपनाम।।
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सीमाओँ में है बँधीनारी की आवाज।
नारी की कमनीयताकमजोरी है आज।।
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सदियों से महिलाओं काहोता मर्दन मान।
अहंकार का पुरुष मेंअब भी भाव प्रधान।।

केवल कागज-कलम मेंनारी दुर्गा-रूप।
मान नहीं उसको मिलापोथी के अनुरूप।।
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अब तक भी परिवेश मेंआया नहीं सुधार।
केवल हैं कानून मेंनारी के अधिकार।। 
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शक्ति-स्वरूपा हो भलेमाता का अवतार।
नारी की सुनता नहींकोई करुण पुकार।।
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आओ महिलादिवस परऐसे करें उपाय।
जग में नारी-जाति परकहीं न हो अन्याय।।
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6 टिप्‍पणियां:

  1. जब तक नारी के प्रति समाज की सोच नहीं बदलेगी तब तक परिवर्तन संभव नहीं ।

    बहुत अच्छे दोहे ।

    जवाब देंहटाएं
  2. --
    शक्ति-स्वरूपा हो भले, माता का अवतार।
    नारी की सुनता नहीं, कोई करुण पुकार।।
    --
    आओ महिलादिवस पर, ऐसे करें उपाय।
    जग में नारी-जाति पर, कहीं न हो अन्याय।। नारी के सम्मान में,सुंदर भावों भरी अनुपम कृति..आपका हृदय से आभार..

    जवाब देंहटाएं
  3. लीक पीटने का कहीं, छूट न जाय रिवाज।
    मना रहा है इसलिए, महिला-दिवस समाज।।
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    जग में अब भी हो रहे, मौखिक जोड़-घटाव।
    कैसे होगा दूर फिर, लिंग-भेद का भाव।
    ..चिंतनशील गंभीर विचारणीय सामयिक रचना प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (०९-०३-२०२१) को 'मील का पत्थर ' (चर्चा अंक- ४,००० ) पर भी होगी।

    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  5. महिला दिवस पर प्रेरक रचना

    जवाब देंहटाएं
  6. चिंतन परक दोहे नारी की दशा पर ।
    सुंदर सृजन आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं

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