"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

सोमवार, 1 मार्च 2021

दोहे "बहुत कठिन है राह" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
मार्च महीना आ गया
मन है बहुत उदास।
फिर भी सबको प्यार सेबुला रहा मधुमास।१।
--

महँगाई के दौर में, जपो राम का नाम।
आसमान को छू रहे, ईंधन के अब दाम।२।
--
महँगाई पर मौन हैं, मोदी, नड्डा-शाह।
भगवा की बंगाल मे, बहुत कठिन है राह।३।
--
गेहूँ-सरसों फूलते, रहे सुगन्ध लुटाय।
मधुमक्खी-तितली-भ्रमर, खेतों में मँडराय।४।
--
झड़बेरी पर छा गये, खट्टे-मीठे बेर।
करते हैं अठखेलियाँ, तीतर और बटेर।५।
--
पतझड़ आया तो हुआ, नंगा-नंगा गात।
बसन्त अपने साथ में, लाया नूतन पात।६।
--
मन को बहुत लुभा रहे, ये उपवन के फूल।
कितने प्यार-दुलार से, सुमन पालते शूल।७।
--
गंगा जी में बह रहा, निर्मल-पावन नीर।
काँवड़ लेने जायेंगे, अब बहनों के बीर।८।
--

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सार्थक दोहे । मौसम , मंहगाई , राजनीति सभी शामिल हैं आज तो।

    जवाब देंहटाएं
  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (2-3-21) को "बहुत कठिन है राह" (चर्चा अंक-3993) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  3. गंगा जी में बह रहा, निर्मल-पावन नीर।
    काँवड़ लेने जायेंगे, अब बहनों के बीर।।
    अति सुन्दर सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  4. आदरणीय शास्त्री जी,
    प्रत्येक दोहा गहरे अर्थ संजोए हुए है।

    गंगा जी में बह रहा, निर्मल-पावन नीर।
    काँवड़ लेने जायेंगे, अब बहनों के बीर।

    यह दोहा तो आज की दोहावली के शिखर पर विराजित है। हृदय भावविभोर हो गया है इसे पढ़ कर, इसके मर्म को आत्मसात करके....
    नमन आपकी लेखनी को 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  5. सुन्दर भाव लिए अप्रतिम दोहे, बहुत बहुत बधाई शास्त्री जी

    जवाब देंहटाएं
  6. मार्च महीना आ गया, मन है बहुत उदास।
    फिर भी सबको प्यार से, बुला रहा मधुमास।१।
    --
    महँगाई के दौर में, जपो राम का नाम।
    आसमान को छू रहे, ईंधन के अब दाम।२।

    यही तो है आज का यथार्थ... मर्मस्पर्शी दोहे.....
    सादर नमन 🌹🙏🌹

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत कुछ समेटे हुए हैं ये दोहे । निश्चय ही मनन करने योग्य हैं । अभिनंदन आदरणीय शास्त्री जी ।

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails