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शनिवार, 6 मार्च 2021

कविता "मर्दाना शृंगार दिया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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मुझको पुरुष बना कर प्रभु ने
,
बहुत बड़ा उपकार किया है।
नर का चोला देकर भगवन,
अनुपम सा उपहार दिया है।
--
नारी रूप अगर देते तो,
अग्नि परीक्षा देनी होती।
बार-बार जातक जनने की,
कठिन वेदना सहनी होती।।
--
चूल्हे-चौके में प्रतिदिन ही,
खाना मुझे बनाना होता।
सबको देकर भोजन-पानी,
मुझे अन्त में खाना होता।।
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सास-ससुरऔर जेठ-ननद की,
झिड़की सुन चुप रहना होता।
केवल दो आँसू टपकाकर,
मन ही मन सब सहना होता।।
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नारी बनकर तो जीवन की
छिन ही जाती सब आजादी।
इधर-उधर आने-जाने में,
बाधाएँ आड़े आ जाती।।
--
फिर कैसे उन्मुक्तभाव से,
मीठी-मीठी बातें कहते।
कदम-कदम पर पहरे होते,
हरदम सहमे-सहमे रहते।।
--
अपने मन की टीवी-सीडी
और सीरियल देख न पाते।
समाचार उनकी मर्जी के,
देख-देख मन में झुँझलाते।।
--
दाढ़ी-मूछ उगाकर मुख पर,
मर्दाना शृंगार दिया है।।
नर का चोला देकर भगवन,
अनुपम सा उपहार दिया है।
--

14 टिप्‍पणियां:

  1. व्यंग्यात्मक गीत बढ़िया है . नारी का जीवन आसान नहीं न .

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय शास्त्री जी,
    स्त्रियों की व्यथा, दुर्दशा और नियति पर कटाक्ष करते इस गीत के लिए साधुवाद 🙏
    आप स्त्रियों की मनोदशा को समझने में सक्षम श्रेष्ठ रचनाकार हैं... नमन आपको 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  3. स्त्री जीवन के यथार्थ को व्यंजनात्मक शैली में काव्यात्मक अभिव्यक्ति देने के लिए आपको सादर नमन 🙏🌹🙏
    शुभकामनाओं सहित
    - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

    जवाब देंहटाएं

  4. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    07/03/2021 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......


    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. स्त्री जीवन की हर परिस्थिति का शानदार अवलोकन किया है आपने, आदरणीय शास्त्री जी ..व्यंग्यात्मक शैली में लिखी स्त्रियों को सम्मान स्वरूप यह रचना का मूल्य नहीं..सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  6. शानदार अभिव्यक्ति
    वेदना और कटाक्ष एक साथ

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह!बहुत ही सुंदर सृजन सर।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह श्रीमान क्या खूब वर्णन किया है नारी जीवन का। बहुत खूब सुंदर कविता 🙏

    जवाब देंहटाएं
  9. वाह... मान्यवर व्यंगात्मक सृजन,नारी का सम्मान दोनो बहुत खूब।

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर! व्यंगय में वेदना, और वेदना में व्यंग्य, जैसे यिन और यांग

    जवाब देंहटाएं
  11. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं

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