"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

"मस्त बसन्त बहार में..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आई है फिर सुबह सुहानी, बैठे हैं हम इन्तज़ार में।
हार गये थककर दो नैना, दीवाने हो गये प्यार में।।

तन रूखा है-मन भूखा है, उलझे काले-काले गेसू,
कैसे आयें पास तुम्हारे, फँसे हुए हम बीच धार में।

सपनों क दुनिया में हम तो, खोये-खोये रहते हैं,
नहीं सुहाता कुछ भी हमको, मायावी संसार में।

ना ही चिठिया ना सन्देशा, ना कुछ पता-ठिकाना है,
झुलस रहा है बदन समूचा, शीतल-सुखद बयार में।

सूरज का नहीं "रूप" सुहाता, चन्दा अगन लगाता है,
वीराना है मन का गुलशन, मस्त बसन्त बहार में।

20 टिप्‍पणियां:

  1. mosam madhosh hai \ rut hai hasinna \
    mubaarak ho aapko \ phaagun ka mahina.......sundar sirji

    जवाब देंहटाएं
  2. हर मौसम पर आपकी प्रस्तुति विशेष होती है-
    बसंत ऋतु पर भी-
    आभार गुरूजी ||

    जवाब देंहटाएं
  3. patjhad saavan basant bahaar....ek baras ke mausam chaar...paanchva mausam pyaar ka...

    जवाब देंहटाएं
  4. शुबह तो मैने युही ताक लिया फूलों की तरफ
    पता मुझे तब चला की जब माँ ने चाय के लिए आवाज लगाई

    अब भी उनके प्रेम में डूबा हवा हूँ में चला गया था उनकी तरफ
    मेरी नई रचना
    ये कैसी मोहब्बत है

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण,हर मौसम की छटा निराली होती है.
    एक बात पूछना था मान्यवर आपका यह ब्लॉग इन्टरनेट एक्स.में हैंग हो जाता है,जबकि क्रोम में बहुत सहजता से खुलता है.मैं आबू धाबी में रहता हूँ,अन्य पेज के साथ ऐसा नही होता है.

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति ...

    आप भी पधारें
    ये रिश्ते ...

    जवाब देंहटाएं
  7. आदरणीय गुरुदेव श्री आपकी हर प्रस्तुति मन भावन एवं ह्रदय स्पर्शी होती है. यूँ ही आपकी रचनाएँ पढ़ने के लिए मिलती रहें. सादर

    जवाब देंहटाएं
  8. बसन्त बहार, प्यार का संसार, सुन्दर रचना।

    जवाब देंहटाएं

  9. दिनांक 28 /02/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  10. अब तो शास्त्री साहब, लू का मौसम आने वाला है, तब यह कविता ही ठण्ड पहुंचायेगी.

    जवाब देंहटाएं
  11. आपकी पोस्ट 27 - 02- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें ।

    जवाब देंहटाएं
  12. mausham ko bkhubi bya kari sundar prastuti," hamare shahar ka badal to awara hai kya jane,kis saksh ko bhigona hai kis ghar ko bachana hai'888_

    जवाब देंहटाएं
  13. ना ही चिठिया ना सन्देशा, ना कुछ पता-ठिकाना है,
    झुलस रहा है बदन समूचा, शीतल-सुखद बयार में .....बयार में झुलसने की बात में जो विरोधाभास है उसने बहुत प्रभावित किया ...बहुत सुंदर ..भावपूर्ण
    अपने ब्लॉग का पता भी छोड़ रही हूँ .......यदि पसंद आये तो join करियेगा ....मुझे आपको अपने ब्लॉग पर पा कर बहुत ख़ुशी होगी .
    http://shikhagupta83.blogspot.in/

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails