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शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

"मेरा एक पुराना गीत" (डॉ.रूपचन्द्र सास्त्री 'मयंक')

मेरे गीत को सुनिए-
अर्चना चावजी के मधुर स्वर में!



सुख के बादल कभी न बरसे, 
दुख-सन्ताप बहुत झेले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!

अनजाने से अपने लगते,
बेगाने से सपने लगते,
जिनको पाक-साफ समझा था,
उनके ही अन्तस् मैले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!

बन्धक आजादी खादी में,
संसद शामिल बर्बादी में,
बलिदानों की बलिवेदी पर,
लगते कहीं नही मेले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!

ज्ञानी है मूरख से हारा,
दूषित है गंगा की धारा,
टिम-टिम करते गुरू गगन में,
चाँद बने बैठे चेले हैं!
जीवन की आपाधापी में,
झंझावात बहुत फैले हैं!!


16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया स्वर -
    शब्द-भाव अतुलनीय -
    आभार गुरु जी ||

    जवाब देंहटाएं
  2. गुरू जी ये तो पुराना भी नये से बढिया है

    जवाब देंहटाएं
  3. ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    टिम-टिम करते गुरू गगन में,
    चाँद बने बैठे चेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!
    आभार ! बहुत सुन्दर और सार्थक रचना.

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर गीत बन गया अर्चना जी की आवाज पा कर |

    आशा

    जवाब देंहटाएं
  5. sundar geet, mohak swar, संसद शामिल बर्बादी में,
    बलिदानों की बलिवेदी पर,
    लगते कहीं नही मेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    टिम-टिम करते गुरू गगन में,
    चाँद बने बैठे चेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह बहुत खूब

    अर्चना जी आवाज़ का जादू भी चल गया :)

    जवाब देंहटाएं
  7. जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!
    बहुत ही बढियां और संवेदनामयी कविता...

    जवाब देंहटाएं
  8. सही... झंझावात बहुत फैले हैं...~अर्थपूर्ण रचना सर!
    ~सादर!

    जवाब देंहटाएं
  9. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि आज दिनांक 18-02-2013 को चर्चामंच-1159 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    जवाब देंहटाएं
  10. bahut achhi rachna ..hamesha ki tarah .us par se madhur aawaz men gana

    जवाब देंहटाएं
  11. अर्थपूर्ण, सुन्दर और सार्थक रचना ** बन्धक आजादी खादी में,
    संसद शामिल बर्बादी में,
    बलिदानों की बलिवेदी पर,
    लगते कहीं नही मेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    जवाब देंहटाएं

  12. मेरे गीत को सुनिए-
    अर्चना चावजी के मधुर स्वर में!



    सुख के बादल कभी न बरसे,
    दुख-सन्ताप बहुत झेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    अनजाने से अपने लगते,
    बेगाने से सपने लगते,
    जिनको पाक-साफ समझा था,
    उनके ही अन्तस् मैले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    बन्धक आजादी खादी में,
    संसद शामिल बर्बादी में,
    बलिदानों की बलिवेदी पर,
    लगते कहीं नही मेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    टिम-टिम करते गुरू गगन में,


    बहुत खूब . !बहुत सुन्दर रूपकात्मक गीत .

    जवाब देंहटाएं
  13. अच्छी रचना.....
    सुन्दर आवाज़.......

    सादर
    अनु

    जवाब देंहटाएं

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