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गुरुवार, 14 मई 2020

दोहागीत "ओ मेरे मनमीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



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दोहों के संयोग से, बनता दोहागीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।।
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ढाई आखर में छिपादुनियाभर का सार।
जो नैसर्गिकरूप सेउमड़े वो है प्यार।।
प्यार नहीं है वासनाये तो है उपहार।
दिल से दिल का मिलन ही, इसका है आधार।।
प्यारभरे इस खेल में, नहीं हार औ जीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।१।
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माँगे से मिलता नहीं, कभी प्यार का दान।
छिपा हुआ है प्यार मेंजीवन का विज्ञान।
विरह तभी है जागताजब दिल में हो आग।
विरह-मिलन के मूल मेंहोता है अनुराग।।
होती प्यार-दुलार कीबड़ी अनोखी रीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।२।
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जीवनभर बहती रहेबरसाओ वो धार।
सिखलाओ संसार कोक्या होता है प्यार।।
दिल से मत तजना कभीप्रीत-रीत उद्गार।
सारस जीवनभर करेसच्चा-सच्चा प्यार।।
मन की सच्ची लगन हीकहलाती है प्रीत।।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।३।
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कंकड़-काँटों से भरीप्यार-प्रीत की राह।
बन जाती आसान ये, मन में हो जब चाह।।
लेकर प्रीत कुदाल कोसभी हटाना शूल।
धैर्य और बलिदान से, खिलने लगते फूल।।
सरगम के सुर जब मिलें, बजे तभी संगीत।
मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।४।
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6 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (15-05-2020) को
    "ढाई आखर में छिपा, दुनियाभर का सार" (चर्चा अंक-3702)
    पर भी होगी। आप भी
    सादर आमंत्रित है ।
    …...
    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. बड़ीसुन्दरता से ढाई आखर का मर्म समझाया दिया -साधु !

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुंदर मनभावन
    ओ मेरे मनमीत

    जवाब देंहटाएं
  4. सरगम के सुर जब मिलें, बजे तभी संगीत।
    मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।

    वाह !! प्यार के सही मर्म समझता बहुत ही सुंदर सृजन सर ,सादर नमन

    जवाब देंहटाएं
  5. बेहद खूबसूरत दोहा गीत 👌

    जवाब देंहटाएं
  6. प्यार की अति सुंदर व सटीक व्याख्या करते दोहे !

    जवाब देंहटाएं

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