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गुरुवार, 7 मई 2020

दोहे " बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

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जो ले जाये जो लक्ष्य तक, वो पथ होता शुद्ध।
भारत तुम्हें पुकारता, आओ गौतम बुद्ध।।
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बोधि वृक्ष की छाँव में, मिला बुद्ध को ज्ञान।
अन्तर्मन से छँट गया, तम का सब अज्ञान।।
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सुत-दारा को छोड़कर, वन में किया निवास।
राज-पाट सिद्धार्थ को, कभी न आया रास।।
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जिसका अन्तःकरण हो, सभी तरह से शुद्ध।
जीता जो जग के लिए, वो कहलाता बुद्ध।।
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बुद्धम् शरणम् आइए, पकड़ बुद्धि की डोर।
चलो धर्म की राह में, होकर भाव-विभोर।।
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दिव्य ज्ञान की खोज में, मानव हो संलग्न।
बौद्ध धर्म कहता यही, रहो ध्यान में मग्न।।
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सत्य-अहिंसा दूत थे, प्यारे गौतम बुद्ध।
दूर किया जिसने सभी, वातावरण अशुद्ध।।
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10 टिप्‍पणियां:

  1. बौद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी सामयिक प्रस्तुति
    आपको भी बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  3. सादर नमस्कार,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (08-05-2020) को "जो ले जाये लक्ष्य तक, वो पथ होता शुद्ध"
    (चर्चा अंक-3695)
    पर भी होगी। आप भी
    सादर आमंत्रित है ।

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  4. बुद्ध के विचारों को समेटती सुंदर रचना सर ,सादर नमस्कार

    जवाब देंहटाएं
  5. आदरणीय रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी, बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध के संदेशों को रेखांकित करते सुन्दर दोहे। खासकर यह दोहा बहुत अच्छा लगा।
    दिव्य ज्ञान की खोज में, मानव हो संलग्न।
    बौद्ध धर्म कहता यही, रहो ध्यान में मग्न।। सादर साधुवाद ! --ब्रजेन्द्र नाथ

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही सुंदर दोहे आदरणीय सर

    जवाब देंहटाएं
  7. आदरणीय रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी को मेरा सादर प्रणाम । गौतम बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर इनके द्वारा दिए गए संदेशों की प्रस्तुति आपने बहुत ही सहज व सरल तरीके से की है । गौतम बुद्ध के विचारों को आपने अपने शबदों के माध्यम से बहुत ही अच्छा सृजन किया है । बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  8. हार्दिक शुभकामनाएं।
    बहुत सुंदर प्रस्तुति, सार्थक दोहे।

    जवाब देंहटाएं

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