"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

गीत "आजादी अक्षुण्ण हमारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
लहर-लहर लहराता झण्डा, आज बड़े अभिमान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--
पराधीन अपना भारत था, अँगरेजों का शासन था,
भारत में मक्कार-फिरंगी का, सब ओर कुशासन था,
स्वतन्त्रता की भोर हुई थी, वीरों के बलिदान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--
आजादी के परवानों ने, मिलकर बिगुल बजाया था,
अँगरेजो भारत छोड़ो का, नारा यहाँ लगाया था,
भारतमाता की सरहद हैं, रक्षित वीर जवान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--
करते हैं जीतोड़ परिश्रम, कृषक अन्न उपजाते हैं,
जीवन में उनके बल पर ही, हम आनन्द मनाते हैं.
हरी-भरी है अपनी धरती, जग में श्रमिक-किसान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--
प्रजातन्त्र परिवेश हमारा, है सारे जग से न्यारा,
तीन रंग का अपना झण्डा, हमको प्राणों से प्यारा,
न्याय-व्यवस्था होती लागू, सब पर एक विधान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--
हम है वीर सपूत धरा के, सत्य-अहिंसा के पोषक,
शान्ति हमारा मूलमन्त्र है, हम हैं इसके उद्घोषक,
आजादी अक्षुण्ण हमारी, माता के वरदान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--
धरा-गगन में आज हमारी, गूँज सुनाई देती है,
नित्य नये अन्वेषण की, अब झलक दिखाई देती है
ज्ञान और विज्ञान बँधा है, अपने विमल-विधान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--
संविधान लागू भारत का, अब अपने कशमीर में,
देशभक्ति की खुशबू फैली, बहते हुए समीर में,
वन्दे-भारत गूँज रहा है, शैलशिखर-मैदान से।
जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
--

11 टिप्‍पणियां:


  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार (१५-०८-२०२०) को 'लहर-लहर लहराता झण्डा' (चर्चा अंक-३७९७) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. हंसी आती थी कश्मीर से कन्याकुमारी एक हैं। सरकारें झूठ परोसती रहीं और हम समझते रहे हमारे नेता नेक है।आज कहिए शान से पूरे हिन्दुस्तान से हम एक है हम एक हैं।केंद्र का नेता संसद में प्रवेश से पहले दृढ़ता से देता माथा टेक है।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खूब आदरणीय शास्त्री जी

    जवाब देंहटाएं
  4. न्याय-व्यवस्था होती लागू, सब पर एक विधान से।
    - विचारणीय प्वाइन्ट है.

    जवाब देंहटाएं
  5. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सर!

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही सुंदर, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सर

    जवाब देंहटाएं
  7. वन्दे-भारत गूँज रहा है,
    शैलशिखर-मैदान से।
    जन-मन-गण को गाता जन-जन,
    देखो कितनी शान से।।
    --दिल को छू गयी ये पंक्तियां। तिरंगे की शान में देशभक्तिपूर्ण शानदार रचना के लिए साधुवाद । स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और बहुत -बहुत शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  8. संविधान लागू भारत का, अब अपने कशमीर में,
    देशभक्ति की खुशबू फैली, बहते हुए समीर में,
    वन्दे-भारत गूँज रहा है, शैलशिखर-मैदान से।
    जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।
    वाह!!!
    बहुत ही शानदार देशभक्ति गीत।

    जवाब देंहटाएं
  9. करते हैं जीतोड़ परिश्रम, कृषक अन्न उपजाते हैं,
    जीवन में उनके बल पर ही, हम आनन्द मनाते हैं.
    हरी-भरी है अपनी धरती, जग में श्रमिक-किसान से।
    जन-मन-गण को गाता जन-जन, देखो कितनी शान से।।

    बहुत सुंदर गीत 🙏
    जय हिन्द 🇮🇳🙏🇮🇳

    जवाब देंहटाएं
  10. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
    बहुत सुंदर गीत ।

    जवाब देंहटाएं
  11. देशभक्ति से ओतप्रोत सुंदर रचना ! स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनायें !

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails