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गुरुवार, 6 अगस्त 2020

दोहे "कृष्णचन्द्र अधिराज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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बीत गया सावन सखे, आया भादौ मास।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी, है बिल्कुल अब पास।।
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दोपायो से हो रहे, चौपाये भयभीत।
मिल पायेगा फिर कहाँ, दूध-दही नवनीत।।
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जब आयेंगे देश में, कृष्णचन्द्र गोपाल।
आशा है गोवंश का, तब सुधरेगा हाल।।
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हाथ थाम कर अनुज का, जब चलते बलराम।
धरा और आकाश में, मानो हों घनश्याम।।
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जल थल में क्रीड़ा करें, बालक जब नन्दलाल।
नृत्य करेंगी गोपियाँ, ग्वाले देंगे ताल।।
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फल की इच्छा मत करो, कर्म करो निष्काम।
कण्टक वृक्ष खजूर पर, कभी न लगते आम।।
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जन, गण, मन में रम रहे, कृष्णचन्द्र अधिराज।
गीता अमृतपान से, बनते बिगड़े काज।।
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6 टिप्‍पणियां:

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