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सोमवार, 11 अक्तूबर 2021

गीत "हमने छन्दों को अपनाया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गीत-ग़ज़ल, दोहा-चौपाई,

गूँथ-गूँथ कर हार सजाया।

नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

हमने छन्दों को अपनाया।।

 

कल्पनाओं में डूबे जब भी,

सुख से नहीं सोए रातों को।

कम्प्यूटर पर अंकित करके,

कहा आपसे सब बातों को।

जब मौसम ने ली अँगड़ाई,

हमने उसका गीत बनाया।

नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

हमने छन्दों को अपनाया।।

 

 

आमों के बागों में आकर,

जब कोयल ने गान सुनाया।

तब हमने भी कोयलिया के

सुर में अपना शब्द मिलाया।

चिड़ियों के मृदु कोलाहल में

अपना चंचल मन बहलाया।

नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

हमने छन्दों को अपनाया।।

 

मन आनन्दित हो जाता जब,

बच्चों की सुनकर किलकारी।

हमने भी बच्चा बनकर तब,

चहका दी नन्हीं फुलवारी।

वासन्ती उपवन के हर

पत्ते-बूटे को मीत बनाया।

नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

हमने छन्दों को अपनाया।।

 

मनीषियों की सेवा करने का,

जब भी अवसर पा जाते।

साथ हमारे सब घर वाले,

मन में फूले नहीं समाते।

अभ्यागत के संग भोज का

हमने भी आनन्द उठाया।

नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

हमने छन्दों को अपनाया।।

 

इसीलिए तो आज हमारी,

खिलती बगिया है प्रतिपल।

देवों का आशीष हमारे,

सुख-वैभव का है सम्बल।

अपनी कुटिया में हमने भी

महलों जैसा वैभव पाया।

नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

हमने छन्दों को अपनाया।।

 

 

6 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (12-10-21) को "पाप कहाँ तक गंगा धोये"(चर्चा अंक 4215) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. मनीषियों की सेवा करने का,

    जब भी अवसर पा जाते।

    साथ हमारे सब घर वाले,

    मन में फूले नहीं समाते।

    अभ्यागत के संग भोज का

    हमने भी आनन्द उठाया।

    नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

    हमने छन्दों को अपनाया।।..बहुत सुंदर,मनमोहक सृजन,बहुत शुभाकामनाएं आदरणीय शास्त्री जी।

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर, सार्थक रचना !........
    Mere Blog Par Aapka Swagat Hai.

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर छंद - विन्यास! आपसे प्रेरणा मिलती है। --ब्रजेंद्रनाथ

    जवाब देंहटाएं
  5. इसीलिए तो आज हमारी,

    खिलती बगिया है प्रतिपल।

    देवों का आशीष हमारे,

    सुख-वैभव का है सम्बल।

    अपनी कुटिया में हमने भी

    महलों जैसा वैभव पाया।

    नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,

    हमने छन्दों को अपनाया।।

    अनुशासित जीवन और छन्दबद्ध सृजन अन्ततः खुशियाँ ही देते हैं....
    लाजवाब सृजन
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं

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