♥ फोटोफीचर ♥
चल पड़े हैं हम सफर में, कैमरा ले हाथ में।
कैद करने को नजारे, हमसफर है साथ में।।
राह में हमको दिखाई दे गये, फलदार ठेले।
रोक करके कार को क्रय कर लिए अंगूर-केले।।
लाडली प्राची इन्हें खाती बड़े ही चाव से।
आ गये बाबा हमारे शहर, अपने गाँव से।।
पुत्र ने स्वागत किया,
आशीष हमने भी दिया।
संगिनी के साथ में,
जलपान भी जमकर किया।।
साथ सब बैठे हुए हैं,
प्यार ही परिवार है।
चार दिन की ज़िन्दगी में,
प्यार ही आधार है।।
अब चले हम अपने घर को,
राह में थे सुन्दर नज़ारे
श्रीमती जी ने इन्हें कैमरे में
कैद करती चली गयीं।
अरे! यह तो ज़ॉलीग्रांट एयरपोर्ट है!
बस अब ऋषिकेश आने ही वाला है।
यह शायद रेलवे स्टेशन ही होगा!
यहाँ जंगल भी कितना सुन्दर है!
सूखे पत्ते गिर गये हैं
और पेड़ों ने नये पल्लव पा लिये हैं।
सुबह-सुबह सड़क पर
इक्का-दुग्गा वाहन भी दिखाई दे रहे हैं।
अरे यह तो चन्द्रभागा नदी है।
जो 10 महीने सूखी रहती है।
अब हम ऋषिकेश आ गये हैं।
हमारे साथ में रहे आयोग के पूर्व सदस्य
मदनलाल जाटव के घर भी तो जाना है।
सामने फल की दूकान है,
कुछ फल भी तो खरीदने हैं!
त्रिवेणीघाट ऋषिकेश में फूलों की
दुकानें सजी हुई हैं।
चलो हम भी गंगाजल से आचमन कर लेते हैं।
माँ भागीरथी का तटबन्ध कितना सुन्दर है।
श्रीमती जी ने तो गंगाजल से आचमन कर लिया है।
चलो अब हम भी जलाभिषेक कर लेते हैं।
अरे यहाँ तो काले रंग का नन्दी भी आराम कर रहा है।
आओ अब वापिस चलते हैं।
यहाँ से घर के लिए प्रसाद भी तो लेना है!
बाजार में चहल-पहल बढ़ने लगी है।
मदन लाल जाटव की दुकान आ गई है।
हमने अपनी कार रोक दी और
उनकी दुकान पर जा धमके।
दो मित्रों का मिलन बड़ा सुखद रहा।
श्रीमती जी यह दृश्य देखकर
मन ही मन प्रसन्न हो रही हैं।
कितनी सजी-धजी है इनकी दुकान।
अरे जाटव जी को
अपनी किताबें भी तो भेंट करनी हैं।
पिता-पुत्र हमको भावभीनी विदाई देते हुए।
अब हम चले हरिद्वार की ओर-
हर की पौड़ी का विहंगम दृश्य।
यहाँ से तो माता मनसा देवी का
मन्दिर भी दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर
माँ चण्डी देवी का भी मन्दिर है-
और यह है गंगा नदी पर बना
लम्बा और विशाल पुल!
यहाँ से तो चण्डी देवी का मन्दिर
साफ नजर आ रहा है।
अब हम माँ चण्डी देवी के
उड़नखटोले के पास ही पहुँचनेवाले हैं।
और यहाँ से उड़खटोले पर सवार हुआ जाता है।
माँ चण्डी देवी के दरबार में जाने के लिए!
यह है श्यामपुर-काँगड़ी में बने
मनोरम मन्दिरों की झलक।
अरे! अब तो कैमरे की बैटरी लो हो गई है।
शेष अगली यात्रा में ...
waah bahut khub
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर आपके साथ हम भी दर्शन कर लिए!
जवाब देंहटाएंआपकी सुन्दर तस्वीरों के साथ चंडी देवी तक मानो हमने भी यात्रा कर ली आभार आपका इस वृतांत को हमसे सांझा करने के लिए
जवाब देंहटाएंवाह! जी वाह! बहुत ख़ूब
जवाब देंहटाएंउल्फ़त का असर देखेंगे!
देहरादून यात्रा का सुंदर चित्रण,..बेहतरीन प्रस्तुति
जवाब देंहटाएं.
MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....
Aapka yah andaj nirala.
जवाब देंहटाएंकैमरा कार
जवाब देंहटाएंप्लेटें फलदार ।
प्राची फ्रिज कम्प्युटर ।
दिया आशीष जी भर ।
प्राची प्रांजल परिवार।
प्यार का आधार ।।
बाबा दादी चले घर ।
नाराज प्राची बिस्तर पर ।।
सुन्दर नज़ारे ।
जंगल प्यारे प्यारे ।
एयर पोर्ट पर वाह ।
ऋषिकेश की राह ।।
जीवन का दर्शन ।
पल्लव पेड़ पर ।
पुराने पत्ते भूमि पर पड़े ।
खाद बनते सड़े ।।
चन्द्र-भागा का तट ।
पहुंचे रिसिकेश झट ।
फलफूल लेकर ।
पुराने साथी के घर ।।
जय जय गंगे ।
जय जय गंगे ।।
हर की पौड़ी, माँ का मंदिर ।
विशाल पुल, आयेंगे फिर ।।
प्राची प्रांजल के लिए प्रस्तुत --
आभार ।।
सुहाने सफ़र की सुहानी यादें खूबसूरती से संजोयी हैं।
जवाब देंहटाएंसुहाना सफर...और ये मौसम हंसी!....वाह!...सब कुछ सुन्दरतम!...कैमरे का मजा तो कुछ और ही रंग ले आया!....आभार!
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छे दर्शन करा दिए घर बैठे ही हमें तो.
जवाब देंहटाएंचित्रों में व्यक्त सम्पूर्ण यात्रा।
जवाब देंहटाएंओह पूरा उत्तरांचल घुमा दिया आपने
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