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गुरुवार, 24 अक्तूबर 2019

दोहे "कुछ अभिनव उपहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


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करते हमें निरोग जो, हरते हैं अवसाद।
उन धन्वन्तरि देव को, आज कीजिए याद।।
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धनतेरस के पर्व पर, सजे हुए बाज़ार।
घर में अपने ला रहे, लोग नये उपहार।।
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झालर-दीपों से सजें, आज सभी के नीड़।
धरती पर पसरी हुई, तारों की है भीड़।।
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चलकर आई धरा पर, चन्दा की बारात।
इसीलिए आकाश में, हुई अँधेरी रात।।
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दीवाली पर हो रहा, खुशियों का इजहार।
मिष्ठानों से हैं सजे, आज सभी बाजार।।
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रहे साथ में शारदे, गौरी और गणेश।
आती है जब सम्पदा, तब सुधरे परिवेश।।
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उल्लू बन जाना नहीं, पाकर द्रव्य अपार।
धन-दौलत के साथ हो, मेधा का उपहार।।
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बैरभाव को छोड़कर, बाँटो सबको प्यार।
धनतेरस पर दीजिए, कुछ अभिनव उपहार।।
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