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गुरुवार, 17 अक्तूबर 2019

दोहे "करवाचौथ सुहाग का, होता पावन पर्व" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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अपने पतियों पर करेंसभी नारियाँ गर्व।
करवाचौथ सुहाग काहोता पावन पर्व।।
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सजनी करवाचौथ पररखती है उपवास।
साजन-सजनी के लिएदिवस बहुत ये खास।।
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जन्म-जिन्दगीभर रहेसबका अटल सुहाग।
साजन-सजनी में सदाबना रहे अनुराग।।
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जरा-जरा सी बात परकभी न हो तकरार।
पति-पत्नी के बीच मेंआये नहीं दरार।।
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प्रीति सदा बढ़ती रहेआपस में हो प्यार।
पावन करवाचौथ हैनिष्ठा का त्यौहार।।
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वंश-बेल चलती रहेहँसी-खुशी के साथ।
पति-पत्नी का उमर भररहे सलामत साथ।।
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परम्परा बदली बहुतबदल न पाया ढंग।
अब भी पर्वों का चलननहीं हुआ है भंग।।
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माता करती कामनासुखी रहे परिवार।
छिने न करवाचौथ काबहुओं से अधिकार।।
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2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! पर्व अनुसार बहुत सुन्दर दोहे।

    जवाब देंहटाएं
  2. परम्परा बदली बहुत, बदल न पाया ढंग।
    अब भी पर्वों का चलन, नहीं हुआ है भंग।

    यथार्थ... ज़माने ने सब चाल चलन बदल दिए लेकिन हमारे रीति रिवाज, त्यौहार ज्यों के त्यों गर्व और शान से मनाएं जाते हैं
    यहीं खूबसूरती है हमारी संस्कृति की
    दुआ  मेरी नयी रचना पर पधारें

    जवाब देंहटाएं

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