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गुरुवार, 3 अक्तूबर 2019

दोहे "कुछ तो करो यकीन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गाँधी बाबा मत करो, आज राम को याद।
जन्मभूमि पर हो रहे, जमकर वाद-विवाद।।
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हुआ नहीं इस वाद का, अब तक पूर्णविराम।
न्यायालय की शरण में, हैं जन-जन के राम।।
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सारी दुनिया जानती, भारत के थे राम।
फिर क्यों भारत देश में, मचा हुआ कुहराम।।
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मन्दिर-मसजिद तक हुई, सीमित अब तो सोच।
राम और रहमान को, लोग रहे हैं नोच।।
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राम-राज की कल्पना, कैसे हो स्वीकार।
हारे के हरिनाम का, खिसक रहा आधार।।
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त्रेता युग से चल रहा, लीलाओं का दौर।
कठमुल्ला करते नहीं, तवारीख पर गौर।।
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कठमुल्लाओं न्याय पर, कुछ तो करो यकीन।
धर्म सनातन विश्व में, है सबसे प्राचीन।।
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1 टिप्पणी:

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