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बुधवार, 11 दिसंबर 2019

गीत "दम घुटता है आज चमन में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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सज्जनता बेहोश हो गई,
दुर्जनता पसरी आँगन में।
कोयलिया खामोश हो गई,
मैना चहक रहीं उपवन में।।
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गहने तारे, कपड़े फाड़े,
लाज घूमती बदन उघाड़े,
यौवन के बाजार लगे हैं,
नग्न-नग्न शृंगार सजे हैं,
काँटें बिखरे हैं कानन में।
मैना चहक रहीं उपवन में।। 
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मानवता की झोली खाली,
दानवता की है दीवाली,
चमन हुआ बेशर्म-मवाली,
मदिरा में डूबा है माली,
दम घुटता है आज वतन में।
मैना चहक रहीं उपवन में।। 
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शीतलता रवि ने फैलाई,
पूनम ताप बढ़ाने आई,
बेमौसम में बदली छाई,
धरती पर फैली है काई,
दशा देख दुख होता मन में।
मैना चहक रहीं उपवन में।। 
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सुख की खातिर पश्चिमवाले,
आते थे होकर मतवाले,
आज रीत ने पलटा खाया,
हमने उल्टा पथ अपनाया,
खोज रहे हम सुख को धन में।
मैना चहक रहीं उपवन में।। 
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 शावक सिंह खिलाने वाले,
श्वान पालते बालों वाले,
बौने बने बड़े मनवाले,
जो थे राह दिखाने वाले,
भटक गये हैं बीहड-वन में।
मैना चहक रहीं उपवन में।।
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8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12.12.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3547 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी ।

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  2. शानदार! बहुत ही अच्छा लिखा है ऐसे ही लिखते रहिए। हम कविता तो नहीं पर शायरी लिखते हैं। हमारी शायरी पढ़ने के लिए आप नीचे क्लिक कर सकते हैं।
    जुल्फ शायरी
    मौत के ऊपर शायरी

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर गीत! सटीक सा चित्रण करती आज के समय का।

    जवाब देंहटाएं
  4. bahut achhi article likhi hai aapne
    ashwagandha benefits in hindi

    जवाब देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं

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