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सोमवार, 2 दिसंबर 2019

प्रकाशन "साहित्यसुधा पाक्षिक पत्रिका में मेरा गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
मीत बेशक बनाओ बहुत से मगर, मित्रता में शराफत की आदत रहे। स्वार्थ आये नहीं रास्ते में कहीं, नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।। -- भारती का चमन आप सिंचित करो, भाव मौलिक भरो, शब्द चुनकर धरो, काल को जीत लो अपने ऐमाल से, गीत में सुर की धारा सलामत रहे। नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।। -- आपकी बात से, ज्ञान गंगा बहे, मन में उल्लास हो, गात चंगा रहे, बन्दगी में दिखावा कभी मत करो, आशिकी में भी शुचिता सलामत रहे। नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।। -- मत घमण्डी बनो, बैर को छोड़ दो, जिन्दगी सादगी की, तरफ मोड़ दो, ढाई आखर का है बस यही फलसफा, आदमीयत का ज़ज़्बा सलामत रहे।। नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।। -- दिलरुबा नेह का धर्म तो जान लो, आप अच्छा-बुरा कर्म तो जान लो, ‘रूप’ दरिया नहीं एक तालाब है, साथ सूरत के सीरत सलामत रहे। नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।।
--

2 टिप्‍पणियां:

  1. --
    दिलरुबा नेह का धर्म तो जान लो,
    आप अच्छा-बुरा कर्म तो जान लो,
    ‘रूप’ दरिया नहीं एक तालाब है,
    साथ सूरत के सीरत सलामत रहे।
    नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।।

    लाजबाब सृजन ,बहुत सुंदर और विचारणीय बात कही " पहले अच्छा बुरा कर्म तो जान लो " सादर नमन सर

    जवाब देंहटाएं
  2. हमेशा की तरह सच्ची और सीधी-सादी बानी में अच्छी और उपयोगी बातें !

    जवाब देंहटाएं

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