|
--
लगता है अब देश
में, हार गयी है शर्म।
प्रतिदिन होते हैं
यहाँ, यत्र-तत्र दुष्कर्म।।
--
इस बदतर हालात का,
अपराधी है कौन।
भौंडे टीवी दृश्य
पर, जनसेवक क्यों मौन।।
--
कामुकता पसरी हुई,
चलचित्रों में आज।
उठती नहीं विरोध
में, जनता की आवाज।।
--
संसद में भी सांसद,
देते नहीं सुझाव।
सामाजिकता का हुआ,
चारों ओर अभाव।।
--
जकड़ा मत के जाल
में, ऋषि-मुनियों का देश।
कैसे बदलेगा यहाँ,
अब कामुक परिवेश।।
--
नभ पर बादल झूठ के,
सच का सूरज अस्त।
इसीलिए तो देश
में, अपराधी हैं मस्त।।
दानवता की जीत है,
मानवता की हार।
रोटी-सबजी-दाल का,
सिमट गया संसार।।
--
|
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |

सटीक प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसुंदर और सटीक अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंसुंदर और सटीक अभिव्यक्ति Free Song Lyrics
जवाब देंहटाएं