"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

सोमवार, 6 दिसंबर 2021

दोहे "अब इस ओमीक्रोन से, कैसे पायें पार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कोरोना फिर आ गया, लेकर नूतन रूप।

देश और परदेश में, रोग हुआ विद्रूप।।

--

आया ओमीक्रोन का, चर्चा में अब नाम।

होकर बहुत सतर्क ही, करना अपने काम।।

--

पूरी दुनिया के लिए, चिन्ता की है बात।

इसका अभी इलाज भी, नहीं किसी को ज्ञात।।

--

जड़-जंगल है संक्रमित, दूषित गंगा धार।

अब इस ओमीक्रोन से, कैसे पायें पार।।

--

जीवन में दुर्लभ हुई, अब तो सुख की भोर।

फैल रहा है संक्रमण, दुनिया में चहुँ ओर।।

--

आया समय चुनाव का, होगी भारी भीड़।

कितनों के इस रोग से, उजड़ेंगे अब नीड़।।

--

ऐसे करो उपाय अब, घटे रोग फैलाव।

करो स्थगित देश में, थोड़े समय चुनाव।।

--


6 टिप्‍पणियां:

  1. होकर बहुत सतर्क ही, करना अपने काम"
    यही मूल मंत्र है

    जवाब देंहटाएं
  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (07-12-2021 ) को 'आया ओमीक्रोन का, चर्चा में अब नाम' (चर्चा अंक 4271) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. बिल्कुल सही कहा आपने
    होकर बहुत सतर्क करना है हर काम...

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रणाम, बहुत सुंदर कव‍िता में ढला ओमीक्रोन भी सोचेगा क‍ि शास्‍त्री जी ने तो हमें भी न‍िशाने पर ले ल‍िया

    जवाब देंहटाएं
  5. अति सुंदर एवं सामयिक रचना।धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails