"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

मंगलवार, 4 अगस्त 2009

‘‘हाइकू’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



जापानी छन्द ‘‘हाइकू’’ में बने तीन चित्र


भार से कैसा लदा है?
लेकिन चलता जा रहा है,
आदमी क्या गधा है?


-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-


लैला तो एक है,
पागल हुए घूम रहे,
मजनूँ अनेक हैं,


-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-


एक ही अनार है,
खाने को हो रहे उतावले,
सैकड़ों बीमार हैं,
-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-



21 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
  2. लैला तो एक है,
    पागल हुए घूम रहे,
    मजनूँ अनेक हैं,

    waah.. too good...!

    जवाब देंहटाएं
  3. एक ही अनार है,
    खाने को हो रहे उतावले,
    सैकड़ों बीमार हैं,

    देश की भी आज येही हालत है |हर नेता देश को अपनी निजी संम्पत्ति मान उसका उपभोग करने में लगा हुआ है |

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत बढिया...हाइकू का अलग ही मिज़ाज़ और मज़ा है.

    जवाब देंहटाएं
  5. शास्त्री जी , यह हाईकू नहीं बल्कि क्षणिकाएँ है. शीर्षक संशोधित कर लीजिये.

    जवाब देंहटाएं
  6. majaa aa gaya bahu t hi sundar baat kari hai ......jabaab nahi hai .....atisundar

    जवाब देंहटाएं
  7. प्रताप नारायण सिंह जी।
    मर्यादा तो हाइकू की ही निभाई है।
    शीर्षक तो बदल ही दूँगा परन्तु
    हाइकू की परिभाषा तो बता दें।

    जवाब देंहटाएं
  8. हाइकू बहुत ही अच्छे लगे, क्या यह और त्रिवेणियां एक ही चीज हैं.

    जवाब देंहटाएं
  9. लैला तो एक है,
    पागल हुए घूम रहे,
    मजनूँ अनेक हैं,
    waah bahut khub.
    haiku ka ek niyam hai ke first line mein sirf 5 shabd ho,second line mein 7sgabd ho aur third line mien phir se 5 shabd ho.

    जवाब देंहटाएं
  10. महक जी!
    जहाँ तक मेरा अनुमान है, हाइकू की पहली पंक्ति में 5 से 9 तक अक्षर हो सकते हैं, दूसरी में 7 से 12 तक अक्षर तथा तीसरी पंक्ति में 5 से 9 तक अक्षर हो सकते हैं।
    इससे अधिक मैं जानता नही हूँ।

    जवाब देंहटाएं
  11. शाश्त्रीजी जो भी हो पर आज तो आपने चाल्हे पाड दिये.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  12. ये त्रिवेणी हो या हाइकु ...बहुत ही अच्छा है.

    जवाब देंहटाएं
  13. हायकू जैसे ही हैं और खूब जमें हैं। जय हो।

    जवाब देंहटाएं
  14. shukriya batane ke liye,hame bhi jyada kuch nahi pata,bas o kahi padha tha likhe diye.

    जवाब देंहटाएं
  15. वाह बहुत बढ़िया! हाइकु अक्सर सुनने को मिलता है और आपने बहुत सुंदर रचना लिखा है!

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails