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सोमवार, 24 अगस्त 2009

‘‘मन में फिर आनन्द समाया’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


तुम आये तो जीवन आया,
मन में फिर आनन्द समाया।

गीत रचाया हमने पूरा,
लेकिन लगता हमें अधूरा,
तुम आये तो सावन आया,
शब्दों में फिर बन्द समाया।
मन में फिर आनन्द समाया।।

केशर-क्यारी महक रही थी,
श्वाँस हमारी बहक रही थी,
आकर तुमने गले लगाया,
सुन्दर सुर में छन्द सुनाया,
मन में फिर आनन्द समाया।

18 टिप्‍पणियां:

  1. शब्दों मे क्या भाव समाया,
    पढ़ कर कविता मन हर्षाया.

    जवाब देंहटाएं
  2. मन में आनंद समाया है
    पहले से बसा हुआ है
    हमने कभी नहीं भगाया है
    इसलिए फिर का प्रश्‍न कहां से आया है।

    जवाब देंहटाएं
  3. केशर-क्यारी महक रही थी,
    श्वाँस हमारी बहक रही थी,
    आकर तुमने गले लगाया,
    सुन्दर सुर में छन्द सुनाया,
    मन में फिर आनन्द समाया।

    waah maza aa gaya .badhai!!!

    जवाब देंहटाएं
  4. केशर-क्यारी महक रही थी,
    श्वाँस हमारी बहक रही थी,
    आकर तुमने गले लगाया,
    सुन्दर सुर में छन्द सुनाया,
    मन में फिर आनन्द समाया।

    waah maza aa gaya .badhai!!!

    जवाब देंहटाएं
  5. इसी तरह आनंदित होते रहें इश्वर से यही प्रार्थना है |सुन्दर भावपूर्ण रचना |

    जवाब देंहटाएं
  6. गीत में आनन्द आ गया
    मन में बहुत ही भा गया
    एक ही लफ्ज़ तिहराऊंगा
    छा गया छा गया छा गया

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना है !

    जवाब देंहटाएं
  8. waah waah .........bahut hi khoobsoorat geet hai.umang jagat geet.

    जवाब देंहटाएं
  9. kya baat hai... kisi ek ke jivan main aane se sach main bahut kuch badal jata hai, aapne bahut acche se us baat ko shabd diye hai.. badhai..!

    जवाब देंहटाएं
  10. केशर-क्यारी महक रही थी,
    श्वाँस हमारी बहक रही थी,
    आकर तुमने गले लगाया,
    सुन्दर सुर में छन्द सुनाया,
    मन में फिर आनन्द समाया।
    सुंदर!!!!खूबसुरत कविता!

    जवाब देंहटाएं
  11. SUNDAR RACHNA ...... SUNDAR SHABD HAI IS RACHNA KE ...... SACH MEIN MAN MEIN AANAND AA SAMAAYA ....

    जवाब देंहटाएं
  12. सुन्दर सुर में छन्द सुनाया,
    मन में फिर आनन्द समाया।

    sur, chhand aur aanand - bahut badiya

    जवाब देंहटाएं

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