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सोमवार, 17 अगस्त 2009

‘‘बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जिन्दगी चल रही चिमनियों की तरह।

बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।


लाडलों के लिए पूरे घर-बार हैं,

लाडली के लिए संकुचित द्वार हैं,

भाग्य इनको मिला कंघियों की तरह।

बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।


रंक माता पिता की हैं मुश्किल बढ़ी,

ताड़ सी पुत्रियों की हैं चिन्ता बड़ी,

भूख वर की बढ़ी भेड़ियों की तरह।

बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।


शादियों में बहुत माँग जर की बढ़ी,

नोट की गड्डियों पर नजर हैं गड़ी,

रोग है बढ़ रहा कोढ़ियों की तरह।

बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।


ये ही पीड़ा हृदय में रहेगी सदा,

लेखनी दर्द इनका लिखेगी सदा,

इनकी ससुराल है बेड़ियों की तरह।

बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. mayank ji.
    aapki kavita ne to bhav vibhor kar diya hai.
    mujhe bhi apani betiyon ki chinta satane lagi hai.

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सही स्थिति उकेरी है रचना में आभार

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही बेहतरीन एवं भावुक रचना.....

    जवाब देंहटाएं
  4. बिल्कुल सही बात फ़रमाया है आपने! बहुत ही भावपूर्ण रचना!

    जवाब देंहटाएं
  5. लाडलों के लिए पूरे घर-बार हैं,

    लाडली के लिए संकुचित द्वार हैं,
    मयंक जी हमेशा की तरह एक सुन्दर और भावम्य कविता के लिये बधाई

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सही कहा शास्त्री जी, शहरो में भले ही स्थिति में थोडा सुधार जरूर है, मगर गाँवों में कमोवेश यही स्थिति है और मैं इसके लिए माँ को ज्यादा जिम्मेदार ठहराता हूँ, क्योंकि पिता का फिर भी बेटी से अधिक लगाव होता है !

    जवाब देंहटाएं
  7. समाज के एक बहुत बड़े वर्ग का कहानी कहती हुई

    जवाब देंहटाएं
  8. behtreen........shandar............satya ko darshati rachna.

    जवाब देंहटाएं
  9. जिन्दगी चल रही चिमनियों की तरह।
    बेटियाँ पल रही कैदियों की तरह।।

    वाह वाह....शास्त्री जी!
    दिल को हिला देने वाली कविता लिखी है आपने।

    जवाब देंहटाएं
  10. sir ji.
    kisi bhi vishay par aap jhat-pat
    kavita likh dete hain.
    aapki lekhani ko naman karta hoon.

    जवाब देंहटाएं
  11. मयंक जी।
    बेटियों का बिल्कुल सही चित्रण किया है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  12. बिल्कुल सही लिखा है सर जी!
    भारत में बेटियों की यही हालत है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं

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