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गुरुवार, 20 अगस्त 2009

‘‘काँटों को फूल मान, चमन में सजा लिया’’ (डॉ रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)





जीने का ढंग हमने, ज़माने में पा लिया।

सारे जहाँ का दर्द, जिगर में बसा लिया।।


दुनिया में जुल्म-जोर के, देखें हैं रास्ते,

सदियाँ लगेंगी उनको, भुलाने के वास्ते,

जख्मों में हमने दर्द का, मरहम लगा लिया।

सारे जहाँ का दर्द, जिगर में बसा लिया।।


हमने तो दुश्मनों की, हमेशा बड़ाई की,

पर दोस्तों ने बे-वजह, हमसे लड़ाई की,

हमने वफा निभाई, उन्होंने दगा किया।

सारे जहाँ का दर्द, जिगर में बसा लिया।।


आया गमों का दौर तो, दिल तंग हो गये,

मित्रों में मित्रता के भाव, भंग हो गये,

काँटों को फूल मान, चमन में सजा लिया।

सारे जहाँ का दर्द, जिगर में बसा लिया।।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)

16 टिप्‍पणियां:

  1. सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है......!!! !!!
    वह शास्त्री जी क्या बात लिखी है .......

    जवाब देंहटाएं
  2. जख्मों पे हमने दर्द का मरहम लगा लिया - वाह शास्त्री जी। सुन्दर।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर रचना ! चित्र भी बहुत अच्छा लगा!

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!
    दर्द ही मरहम हो गया.
    जख्म फिर सहम गया.
    बेहतरीन रचना. सुन्दर अनुभूति.

    जवाब देंहटाएं
  5. हमने तो दुश्मनों की, हमेशा बड़ाई की,
    पर दोस्तों ने बे-वजह, हमसे लड़ाई की,
    हमने वफा निभाई, उन्होंने दगा किया।
    सारे जहाँ का दर्द, जिगर में बसा लिया।।

    bahut hi bhavpoorn rachna lagi dil se badhai!!

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर रचना. चित्र भी बहुत सुंदर.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  7. काफी अच्छी लगी रचना आपकी. हिंदी टाइपिंग टूल भी काफी उपयुक्त जगह जोड़ा है आपने. धन्यवाद.

    जवाब देंहटाएं
  8. क्या लिखे ................ सच ही तो लिखा है आपने !!

    "आया गमों का दौर तो, दिल तंग हो गये,

    मित्रों में मित्रता के भाव, भंग हो गये,"

    आज कल के दौर में कितने लोग है जो सच्ची दोस्ती निभाते है ,हर बन्दा अपने लाभ के लिए ही मिलता है आपसे | आप का कोई काम हो तो हर कोई...." busy हूँ भाई !!!"

    बहुत सुंदर रचना !

    जवाब देंहटाएं
  9. सुन्दर गीत है,
    गाने को मन मचल जाता है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  10. zakhmon mein humne dard ka marham laga liya.........waah ,gazab kar diya........aaj to bahut hi gahre bhavon ke sath likha hai jaise koi zakhm udhad gaya ho aur aapne us par shabdon ka marham lagaya ho.

    जवाब देंहटाएं
  11. वाह शास्त्री जी सुन्दर रचना..देर से पढ़ने के लिए क्षमा

    जवाब देंहटाएं
  12. आया ग़मों का दौर तो दिल तंग हो गए
    जानदार पंक्ति

    जवाब देंहटाएं

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