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मंगलवार, 25 अगस्त 2009

‘‘जलवे ही जलवे मेरे देश में हैं’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



ठलवे ही ठलवे मेरे देश में हैं।
जलवे ही जलवे मेरे देश में हैं।।

भवन खोखला कर दिया है वतन का,
अमन-चैन छीना है अपने चमन का,
बलवे ही बलवे मेरे देश में हैं।
जलवे ही जलवे मेरे देश में हैं।।

नेताओं ने चाट ली सब मलाई,
बुराई के डर से छिपी है भलाई,
हलवे ही हलवे मेरे देश में हैं।
जलवे ही जलवे मेरे देश में हैं।।

चारों तरफ है अहिंसा का शोषण,
घर-घर में पैदा हुए हैं विभीषण,

मलवे ही मलवे मेरे देश में हैं।
जलवे ही जलवे मेरे देश में हैं।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. TOPIC IS GOOD.
    WORDS ARE VERY-VERY ORDINARY.
    WE EXPECT GOOD VOCABULARY FROM YOU.
    PERHAPS THIS COMMENT WILL HURT YOU.
    BUT FROM MY HEART I REALLY EXPECT GOOD SHABDAWALI MEANS POETIC WORDS FROM YOU.
    ALTHOUGH THE TOPIC IS GOOD.
    RAMESH SACHDEVA

    जवाब देंहटाएं
  2. सही बात
    सच्ची बात
    बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह शानदार रचना! बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने जो सच्चाई का प्रतीक है!

    जवाब देंहटाएं
  4. चारों तरफ है अहिंसा का शोषण,
    घर-घर में पैदा हुए हैं विभीषण,
    मलवे ही मलवे मेरे देश में हैं।
    जलवे ही जलवे मेरे देश में हैं।।

    बेहतरीन रचना.बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर चित्रण किया देश का..
    वर्तमान तो कुछ ऐसा ही है..सुंदर कविता!!!

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह मयंक जी एक और लाजवाब रचना। बधाई

    जवाब देंहटाएं
  7. बेहतरीन रचना!
    बधाई !
    पर फ़िर भी आप से विनती है की सचदेवा जी की राय पर विचार करे |

    जवाब देंहटाएं
  8. शिवम् जी!
    ACHARYA RAMESH SACHDEVA जी ने जो कुछ कहा मैं समझा नही।
    WORDS ARE VERY-VERY ORDINARY.
    क्या आप स्पष्ट करेंगे कि इनमें कौन से शब्द
    साधारण हैं।
    यदि आपकी दृष्टि में हैं तो मैं स्वयं
    ही बहुत साधारण हूँ तो विशिष्ट शब्द कहाँ से लाऊँगा?
    सचदेवा जी और आपका आभारी रहूँगा।

    जवाब देंहटाएं
  9. "ठलवे ही ठलवे मेरे देश में हैं।"
    एक दम सहमत.
    बहुत सुंदर.

    जवाब देंहटाएं

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